लखनऊ ,12 जून। आज शब में कर्बला दियानुतुद्दौला बहादुर लखनऊ में मरहम दिलशाद हुसैन उर्फ़ मन्नू इब्ने इरशाद हुसैन की मजलिसे बरसी 8:30 बजे होगी इस मजलिस को अली जनाब मौलाना अली अब्बास खान साहब खिताब फरमाएंगे।
मजलिस का आगाज़ तिलावते कलामे पाक से होगा,जिसके बाद शोअराए कराम बारगाहे अहलेबैत अस में मंज़ूम नज़रानए अक़ीदत पेश करेंगे ।जननी मजलिस रात 7:30 बजे मरहूम के घर पर मुनअक़्क़िद होगी ।
मरहूम के भाई सरवर साहब ने तमाम मोमिनीन व मोमिनात से मजलिस में शिरकत किए जाने की दरखवास्त की है । मरहूम को भले ही लोग दिलशाद हुसैन के नाम से कम जानते हो लेकिन मन्नू भाई के नाम से दिलशाद हुसैन साहब लखनऊ ही नहीं लखनऊ के बाहर भी हिंदुस्तान भर में मशहूर थे। उसकी वजह थी मरहूम महफिलों और मजलिसों की जान थे। वजह यह थी कि कोई भी शायर या मौलाना इनकी दाद ओ तहसीन के बिना नहीं जा सकता था । मरहूम अहलेबैत से इतनी मोहब्बत करते थे कि उनकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा कभी मजलिस कभी मातम कभी अंजुमन दारी कभी महफिले कभी नमाज़ ओ रोजा और बचे हुए वक्त में अपना रोजगार संभालते थे। मरहूम का इंतकाल हुए आज 1 साल हो रहा है और लोगों को यह साल कम से कम 20 बरस के बराबर महसूस हो रहा है । मरहूम के इंतेकाल से शिया कम्युनिटी को एक बहुत बड़ा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई करना बहुत मुश्किल है।



