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अहम साक्ष्य रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से ग़ायब, चीन ने किया बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण

राहुल गाँधी ने ट्वीट कर पीएम मोदी को घेरा

लखनऊ,संवाददाता | सीमा विवाद को लेकर भारत जहाँ चीन से निरंतर आपसी बात चीत के द्वारा मामले को हल करने का प्रयास करता रहा है वहीँ चीन की ओर से आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है | भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सीमाओं पर सेना में बढ़ोतरी की और अत्याधुनिक हथियारों से जवानों को लैस किया ,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन की हठधर्मी के कारण उसकी खूब किरकिरी हुई और यही कारण है कि अब चीन अपनी खिसियाहट मिटने के लिए अनाप शनाप हरकतें करने पर उतारू हो गया है | अमेरिका समेत कई देशों से जारी तनाव के बीच चीन ने फिर उकसाने वाला काम करते हुए परमाणु हमला करने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का टेस्ट किया है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स ने हाल के युद्धाभ्यास के दौरान डीएफ-26 और डीएफ-16 मिसाइल का टेस्ट किया। यह टेस्ट कब और कहां किए गए हैं इसकी अभी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है |

चीन की डीएफ-26 मिसाइल परमाणु हमला करने में सक्षम है। इस मिसाइल की रेंज 4000 किलोमीटर के आसपास बताई जाती है। जिससे इसकी जद में पूरा भारत सहित प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिका का गुआम नेवल बेस भी शामिल है। चीनी सेना में इस मिसाइल को 2016 में शामिल किया गया था। ख़ास बात ये है कि यह मिसाइल 1200 से 1800 किलोग्राम तक का न्यूक्लियर वॉरहेड भी ले जा सकती है।

चीन की दूसरी मिसाइल डीएफ 16 उसकी पुरानी मिसाइल डीएफ 15 का मॉडिफाइड रूप है। ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाली इस शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज 800 से 1000 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक हमला करने में सक्षम है। हल्की भार की होने के कारण चीनी सेना इसे आसानी से विशेष ट्रक के ऊपर माउंट कर देश के किसी भी कोने में तैनात कर सकती है।

चीनी सेना की एक आधिकारिक न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक़ चीनी रॉकेट फोर्स ब्रिगेड के कमांडर लियु यांग ने कहा कि हम युद्ध की परिस्थितियों को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं। हम आने वाले समय में परमाणु हमले जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में शीघ्र और सटीक कार्रवाई करने के लिए अभ्यास कर रहे हैं।

बताते चलें कि चीनी सेना ने मई की शुरुआत में ही लद्दाख में अतिक्रमण किया था और ये स्वीकार करने वाला एक दस्तावेज भारतीय रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर मंगलवार को प्रकाशित किया गया था लेकिन दो दिन के अंदर ही इसे हटा दिया गया | यह दस्तावेज रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर  वॉट्स न्यू’ सेक्शन में उपलब्ध था लेकिन अब गुरुवार को यह पेज मौजूद नहीं है |
वेबसाइट से दस्तावेज़ ग़ायब होने की ख़बर आते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करके मोदी सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि प्रधानमंत्री झूठ क्यों बोल रहे हैं?

मंगलवार को प्रकाशित हुए इस डॉक्युमेंट में लिखा हुआ था कि पांच मई से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यानी ख़ासकर गलवान घाटी में चीनी आक्रामकता लगातार बढ़ रही है | चीनी पक्ष ने 17-18 मई को कुंगरांग , गोगरा नाला और पैंगॉन्ग झील के उत्तरी किनारे पर चीनी पक्ष ने अतिक्रमण किया था |

यही नहीं इसमें ये भी लिखा था कि क्षेत्र लगातार संवेदनशील बना हुआ है इसलिए इस पर करीब से निगरानी रखने और बदलती स्थिति को देखते हुए जल्द कार्रवाई की ज़रूरत है |
चाइनीज़ अग्रेशन ऑन एलएसी नाम के टॉपिक वाले इस दस्तावेज़ में कहा गया था कि स्थिति को काबू में करने के लिए दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच बातचीत भी हुई थी | इसी सिलसिले में छह जून को दोनों देशों के बीच लेफ़्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत भी हुई थी | बावजूद इसके 15 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष हुआ , जिसमें दोनों तरफ से मौतें हुईं |

राहुल गाँधी ने ट्वीट में लिखा है कि चीन का सामना करना तो दूर की बात, भारत के प्रधानमंत्री में उनका नाम तक लेने का साहस नहीं है | इस बात से इनकार करना कि,चीन हमारी मातृभूमि पर है और वेबसाइट से दस्तावेज़ हटाने से तथ्य नहीं बदलेंगे |

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