
लखनऊ,16 मई । मंगलुरु के दरगाह परिसर में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा सैयद मदनी ग्रैंड मस्जिद की आधारशिला रखना न केवल एक धार्मिक स्थल का प्रतीक है, बल्कि भारत में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की एक मिसाल भी है। कांग्रेस शासित कर्नाटक में यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश और दुनिया में नफरत और विभाजन की बातें जोर पकड़ रही हैं। सिद्धारमैया का यह कदम अवध के नवाबों की उस परंपरा को याद दिलाता है, जिन्होंने मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण में योगदान देकर एकता का संदेश दिया था।इस समारोह में हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें विभिन्न समुदायों के नेता, धार्मिक गुरु और स्थानीय नागरिक थे। सिद्धारमैया ने अपने संबोधन में कहा, “यह मस्जिद केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हमारे साझा इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है। हमारा भारत विविधता में एकता का दर्पण है, और यह मस्जिद उस एकता को और मजबूत करेगी।” मंगलुरु, जो अपनी सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, अब इस मस्जिद के जरिए विश्व पटल पर सामाजिक एकता का नया संदेश देगा।सैयद मदनी ग्रैंड मस्जिद का डिज़ाइन आधुनिक और पारंपरिक इस्लामी वास्तुकला का मिश्रण होगा। इसके परिसर में एक पुस्तकालय, सामुदायिक केंद्र और शैक्षिक संस्थान भी होंगे, जो सभी समुदायों के लिए खुले होंगे। यह परियोजना न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक विकास को भी बढ़ावा देगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मस्जिद क्षेत्र में रोज़गार और पर्यटन को भी प्रोत्साहित करेगी।यह कदम उन ताकतों के लिए करारा जवाब है जो धर्म के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश करती हैं। सिद्धारमैया ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि कर्नाटक सरकार सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान रखती है। यह मस्जिद उसी भावना का प्रतीक है। इतिहास में अवध के नवाबों ने हनुमान मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण में योगदान देकर जो एकता दिखाई थी, वही भावना आज सिद्धारमैया के इस कदम में दिखती है।स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने इस पहल का स्वागत किया है। एक स्थानीय निवासी, अब्दुल रशीद, ने कहा, “यह मस्जिद हमारे लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि हमारा देश सभी धर्मों को गले लगाने की ताकत रखता है।” हिंदू समुदाय के नेताओं ने भी इस पहल की सराहना की। मंगलुरु के एक मंदिर के पुजारी ने कहा, “धर्म हमें जोड़ता है, बांटता नहीं। यह मस्जिद हमारी एकता का प्रतीक बनेगी।”यह आयोजन न केवल कर्नाटक, बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणा है। जब विश्व में धार्मिक तनाव की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं, सिद्धारमैया का यह कदम दिखाता है कि प्यार और एकता की भाषा हर बाधा को पार कर सकती है। सैयद मदनी ग्रैंड मस्जिद भविष्य में न केवल एक पूजा स्थल, बल्कि सामाजिक एकता का केंद्र बनकर उभरेगी।



