लखनऊ, 29 मई ।उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के सीबीगंज थाना क्षेत्र में आज पुलिस ने एक बड़े जालसाजी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस छापेमारी में मिलिट्री इंटेलिजेंस (लखनऊ और बरेली इकाई), स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), और सीबीगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने एक जनसेवा केंद्र पर कार्रवाई की, जो कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा था। इस ऑपरेशन में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले उपकरणों के साथ-साथ कई फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट, और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह रैकेट लंबे समय से अनुचित लाभ कमाने के लिए जनसाधारण के साथ धोखाधड़ी कर रहा था।
छापेमारी का विवरण
पुलिस को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि सीबीगंज थाना क्षेत्र में एक जनसेवा केंद्र के माध्यम से फर्जी दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह केंद्र सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों के नाम पर लोगों को ठगने का काम कर रहा था। मिलिट्री इंटेलिजेंस और पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर योजना बनाई और 29 मई 2025 को तड़के छापेमारी की। इस दौरान जनसेवा केंद्र से कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिनका उपयोग फर्जी दस्तावेज बनाने में किया जा रहा था। इसके अलावा, कई फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, और विभिन्न शैक्षिक संस्थानों की मार्कशीट भी बरामद हुईं।रैकेट का संचालन और संदिग्धजांच के प्रारंभिक चरण में पता चला कि यह रैकेट संगठित तरीके से संचालित हो रहा था। जनसेवा केंद्र के नाम पर लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, और अन्य दस्तावेज बनाने के लिए मोटी रकम वसूली जाती थी। ये दस्तावेज न केवल फर्जी थे, बल्कि इनका उपयोग अवैध गतिविधियों, जैसे कि बैंक खातों में धोखाधड़ी और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी किया जा रहा था। हालांकि, खबरों में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस रैकेट में शामिल मुख्य अभियुक्त कौन-कौन हैं। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन उनके नाम और संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट में कुछ स्थानीय लोग और संभवतः बाहरी राज्यों के अपराधी भी शामिल हो सकते हैं।पुलिस की कार्रवाई और कानूनी कदमसीबीगंज पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (जालसाजी के उद्देश्य से दस्तावेज बनाना), और 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट का नेटवर्क कितना व्यापक है और क्या यह अन्य जिलों या राज्यों तक फैला हुआ है।सामाजिक और राजनीतिक प्रभावइस घटना ने स्थानीय स्तर पर काफी हलचल मचा दी है, क्योंकि जनसेवा केंद्र का कथित तौर पर भाजपा से संबंध होने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है कि इस रैकेट का संचालन करने वालों का सीधा संबंध किसी राजनीतिक दल से है या नहीं। फिर भी, इस खबर ने सोशल मीडिया और स्थानीय समुदाय में चर्चा का विषय बना दिया है। कुछ लोग इसे सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि अन्य लोग इसे एक संगठित अपराध के रूप में देख रहे हैं।आगे की जांच और अपेक्षाएंपुलिस ने हिरासत में लिए गए व्यक्तियों से पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल है। साथ ही, जब्त किए गए उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने फर्जी दस्तावेज बनाए गए और उनका उपयोग कहां-कहां हुआ। स्थानीय निवासियों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है, लेकिन साथ ही मांग की है कि इस रैकेट के पीछे के मुख्य सरगनाओं को जल्द से जल्द पकड़ा जाए।



