लखनऊ, 14 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, विधान पार्षद) के पत्रों और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक नया सरकारी आदेश जारी किया है। 12 सितंबर 2025 को जारी इस आदेश में कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 2018, 2021, और 2025 के पहले के निर्देशों की अवहेलना के बाद आया है, जिसके कारण विधानसभा और संसद में सरकार की आलोचना हो रही थी।मुख्य सचिव (संसदीय कार्य) जेपी सिंह ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक कार्यालय में पत्राचार का एक रजिस्टर रखा जाए, जिसमें जनप्रतिनिधियों के पत्रों का विवरण और उनके जवाब की स्थिति दर्ज हो। आदेश में कहा गया है कि पत्र प्राप्त होने के सात कार्यदिवसों के भीतर कार्रवाई शुरू होनी चाहिए, और जवाब देना अनिवार्य होगा। यदि कोई अधिकारी इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसकी शिकायत मुख्य सचिव कार्यालय या मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज की जाएगी, जिसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कई विधायकों ने शिकायत की थी कि उनके पत्रों पर जिला प्रशासन या विभागीय अधिकारी समय पर जवाब नहीं देते, जिससे जनता की समस्याओं का समाधान लटक रहा है। सीएम योगी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए यह आदेश लागू करने का निर्देश दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कदम सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में है।



