लखनऊ, 27 मई |लखनऊ में आज जहां नवाबों के दौर की रवायत को कायम रखते हुए नुक्कड़ प्रेस द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया वहीं आज ज्येष्ठ माह का तीसरा बड़ा मंगल हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। लखनऊ में इस दिन पूरे शहर में विभिन्न मोहल्लों और चरणों में भंडारे लगाए गए,जिनमें अलीगंज,हजरतगंज,गोमती नगर , विभूति खंड, मानसरोवर योजना सेक्टर-ओ, हैदर गंज चौराहा ,राजाजीपुरम, तालकटोरा, मोहान रोड, दुबग्गा, बालागंज,अमीनाबाद, रकाबगंज, नाका हिंडोला, आलमबाग, चारबाग, कृष्णानगर, भूतनाथ, पांडेयगंज, कपूरथला, सिद्धनाथ पीठ, हनुमंत धाम आदि स्थानों के नाम शामिल हैं।
आज विभिन्न प्रकार के खाने और पीने की व्यंजन ओर पकवान शामिल थे। कहीं आयुर्वेदिक काढ़ा,फल ,मिठाई बट रहा था,तो कहीं गुड़-चना, नारियल वितरित किए जा रहे थे।
लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल को आगे बढ़ाते हुए, नुक्कड़ प्रेस ने इस वर्ष भी ज्येष्ठ महीने के तीसरे बड़े मंगल पर पारंपरिक भंडारे का आयोजन किया। यह आयोजन मेहताब बाग, शीश महल, ज़नाना तालाब के निकट बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
इस विशेष अवसर पर उपस्थित रहीं महंत, देवीया गिरी
इस विशेष अवसर पर उत्तर प्रदेश की पहली महिला महंत, देवीया गिरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने विधिवत रूप से भंडारे की शुरुआत की और कहा, “यह आयोजन बेगम आलिया के समय से चला आ रहा है, और यह ख़ुशी की बात है कि आज भी इसे उसी श्रद्धा से निभाया जा रहा है।”
महंत देवीया गिरी ने नुक्कड़ प्रेस के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि, “इनका यह विश्वास और नीयत ही है जो भंडारे के रूप में सेवा का माध्यम बनता है।” उन्होंने यह भी कहा कि, “लखनऊ की यह तहज़ीब केवल लखनऊ तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा रही है।”
भंडारे में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया, प्रसाद ग्रहण किया और धर्म, सेवा और सौहार्द की भावना को आत्मसात किया। आयोजन के दौरान हिन्दू-मुस्लिम एकता की झलक साफ़ देखने को मिली, जो लखनऊ की पहचान रही है।
नुक्कड़ प्रेस का यह प्रयास न केवल नवाबी दौर की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है, बल्कि आज के समय में भी आपसी प्रेम, सम्मान और एकता के मूल्यों को मज़बूती से आगे बढ़ाता है।



