लखनऊ,25 मई। बुलंदशहर के खानपुर गाँव में एक सगाई समारोह की रंगीनियाँ उस वक्त मातम में बदल गईं, जब दुल्हन के पिता, 52 वर्षीय रामपाल सिंह, नाचते-नाचते अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। यह हृदय विदारक घटना शाम 12 बजे के आसपास हुई, जब रामपाल अपनी बेटी की सगाई की खुशी में मेहमानों के साथ नाच रहे थे। डॉक्टरों ने बाद में पुष्टि की कि उनकी मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हुई। इस घटना ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे गाँव को गहरे सदमे में डाल दिया। खानपुर गाँव के रामपाल सिंह एक सम्मानित किसान और सामाजिक व्यक्ति थे, जिनकी बेटी राधिका की सगाई पास के ही एक गाँव के युवक से तय हुई थी। समारोह की तैयारियाँ हफ्तों से चल रही थीं। घर को रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से सजाया गया था। मेहमानों की भीड़, ढोल-नगाड़ों की थाप, और गीत-संगीत के बीच रामपाल अपनी बेटी की खुशी में पूरी तरह डूबे हुए थे। रामपाल ने मेहमानों का स्वागत करने के बाद मंच पर चढ़कर नाचना शुरू किया। उनकी जोशीली अदाएँ और चेहरे की मुस्कान हर किसी को आनंदित कर रही थी। लेकिन अचानक, एक तेज़ गीत के बीच, वे सीने पर हाथ रखकर गिर पड़े।मौके पर मौजूद मेहमानों ने तुरंत उन्हें उठाया और पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्थानीय चिकित्सक डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि रामपाल को गंभीर हार्ट अटैक हुआ था, और उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि बचाने का कोई मौका नहीं था। परिवार के लिए यह खबर किसी बिजली गिरने से कम नहीं थी। राधिका और उसकी माँ शांति देवी का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि मेहमानों का उत्साह भरा माहौल शोक सभा में बदल गया। ढोल-नगाड़े खामोश हो गए, और सजावट की लाइटें बुझा दी गईं। रामपाल की अचानक मृत्यु ने गाँव में सन्नाटा पसार दिया। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने बताया कि रामपाल पिछले कुछ समय से हल्की थकान की शिकायत कर रहे थे, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। गाँव के बुजुर्ग राम अवतार ने कहा, “रामपाल हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे। उनकी बेटी की सगाई उनके लिए सबसे बड़ा सपना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।”पुलिस ने इस मामले में औपचारिकता के तहत जाँच शुरू की, लेकिन प्रारंभिक तौर पर इसे प्राकृतिक मृत्यु माना जा रहा है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, और परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारियाँ शुरू कर दीं। इस घटना ने सगाई समारोह को अधूरा छोड़ दिया, और राधिका की माँ ने कहा, “हमारी खुशी का दिन अब जिंदगी भर का दर्द बन गया।”यह घटना बुलंदशहर के खानपुर गाँव में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। स्थानीय लोगों ने माँग की है कि गाँव में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएँ ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।



