
लखनऊ,2 मई। शायर-ए-अहलेबैत नय्यर माजिदी की शरीके-हयात और ग़ज़लों की दुनिया का एक बड़ा नाम नाज़िर खय्यामी की बेटी का कल देर रात इंतकाल हो गया। इस दुखद समाचार ने उनके परिवार, साहित्यिक जगत और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ा दी। मरहूमा के निधन की खबर सुनते ही नय्यर माजिदी के प्रशंसक और शुभचिंतक उनके निवास पर पहुंचे और इस दुख की घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाया।
सुबह मरहूमा का जनाजा उनके आवास, वाली गली, से उठा और इमामबाड़ा गुफरान मआब लाया गया। इमाम बाड़े के निकट गुस्ल खाने में मरहूमा को गुस्ल व कफ़न दिया गया । जिसके बाद उनकी नमाज-ए-जनाजा मौलाना जहीर अहमद इफ्तिखार ने पढ़ाई। जबकि मजलिस को मौलाना मीसम जैदी ने खिताब करते हुए मरहूमा की नेकियों का ज़िक्र किया । उन्होंने कहा कि कल ही मरहम ने इंतकाल से पहले अपने बच्चों से कहा था की नौचंदी जुमेरात को मौला अब्बास अलैहिस्सलाम का अलम उठाते रहना, इस अमल को भूलना मत ।इसके अलावा घर में मजलिस इमाम की शहादत विलादत के मौके पर बढ़ चढ़कर मरहूमा हिस्सा लेती थी, और तबर्रुक्त भी बड़े अक़ीदत के साथ तक्सीम करती थी। यही नहीं मरहम अपने भाई, बहनों और जबतक सांस, ससुर जिंदा रहे मरहूमा ने उनकी भी ख़िदमत की । बेहतरीन अख्लाक की मालिक होने की वजहा से लोगों की ज़बान इनकी तारीफ हर वक़्त रहती थी। मौलाना ने मरहूमा की तारीफ के बाद कब्र पर सूर्य फतिया पढ़ने पर भी रोशनी डाली। उसके बाद उन्होंने कर्बला के मसायब पेश किए जिसे सुनकर मौजूद अकीदत मंद रोने लगे। इसके बाद इमामबाड़ा परिसर में
मरहुमा को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान नय्यर मजीदी और उनके परिवार को सांत्वना देने वालों का सिलसिला निरंतर जारी रहा। मरहूमा की मजलिस-ए-तीजा आगामी इतवार को नक्खास में स्थित मस्जिद मौलसिरी में सुबह 10;30 पर आयोजित की जाएगी।
उनकी उदारता, मेहमान नवाजी और नेकदिली से लोग हमेशा प्रभावित रहते थे। वो एक सच्ची मोमिना, नेकदिल इंसान और एक प्रेरणादायी शख्सियत थीं, जिन्होंने अपनी जिंदगी में प्रेम, समर्पण और इंसानियत का उदाहरण पेश किया।
उनके जाने से उनका परिवार और पूरा समुदाय शोकाकुल है।इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार को सब्र और हिम्मत की दुआ करते हैं। अल्लाह से प्रार्थना है कि वह मरहूमा की मगफिरत फरमाए और उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम अता करे। हम यह भी दुआ करते हैं कि कर्बला के शहीदों की तरह, जो मुसीबतों में भी धैर्य का प्रतीक बने, मरहूमा का परिवार इस दुख को सहन करने की ताकत पाए।मरहूमा की यादें, उनका नेक काम और उनकी साहित्यिक व धार्मिक विरासत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी। यह खबर उनके चाहने वालों के लिए एक गहरा सदमा है, लेकिन उनकी जिंदादिली और नेकी की मिसाल हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।
मरहूम के पासमंदगान में चार बेटियां और दो लड़के हैं । बेटे हुमैर मजीदी और हिमाइल मजीदी को आज उनकी वालिदा के दुनिया से रुखसत होने पर बहुत दुखी और बेकरार देख गया ।उनकी बच्चियों भी बेकरार हैं,लेकिन जाने वाले को कौन वापिस ल सकता है । वक्त से पहले यदि किसी को मौत आती है तो उसके साथियों ,उसके घर वालों को कुछ ज्यादा ही तकलीफ होती है ,और यही तकलीफ उनके बच्चों में उनके इंतकाल के बाद साफ नजर आ रही थी ।
इस मौके पर शहर लखनऊ के कई शायरों ,धर्म गुरुओं और शिया वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैसी और हुसैनी टाईगर के बानी शमीम शमसी ने भी शिरकत की।



