लखनऊ,17 अप्रैल। हज़रत अली असगर अस की विलादत के पुर मसर्रत मौक़े पर कल शायर ए अहलेबैत नय्यर मजीदी साहब के मकान में हर साल की तरह इस साल भी तरही महफिल का इनएक़ाद हुआ। महफिल का आगाज औन साहब ने दुआ ए सनम ए कुरैश की तिलावत से किया।महफिल की निजामत असद आज़मी साहब ने की।

इस बार जो मिसरा ए तरह क़ुरांदाजी से निकला गया था वो”देना है तहनियत मुझे उम्में रबाब को”था। इसी मिसरे में मौजूद शोअरा करम ने मनक़बत पेश की। हालांकि दोपहर 2 बजे से शुरू होकर मगरिब की नमाज़ से क़ब्ल खत्म होने वाली इस महफिल में मुतारनिम शायर के लिए छह शेर और तहतुल लफ्ज़ शायरों के लिए आठ शेरों की क़ैद थी।
जिस तरह से क़ुरांदाजी से शायरों के नामों की पर्चियां निकलती रहीं उसी तरह से शोअरा अपना कलाम पेश करते रहे।
महफिल में नासिर जरवली साहब, शकील उतरौलवी साहब, खुर्शीद फतेहपुरी साहब, जावेद बरकी साहब, डॉक्टर अना आज़मी साहब, मीसम ज़ैदी साहब, फय्याज लखनवी, इरफान जंगीपुरी साहब, वसी जौनपुरी साहब,नजफ उतरौलवी साहब, अख्तर लखनवी साहब, ताहिर कानपुरी साहब,ज़की भारती, आबिद नज़र साहब,अम्बर आब्दी, सलमान तबिश साहब, तय्यब लखनवी साहब, शुमूम आरफी साहब, नग़्मी मोहानी साहब,हसन जाफर साहब, फरमान लखनवी साहब, कौसर रिज़वी साहब,फ़ैज़ान जाफर साहब, कुमैल लखनवी साहब, शेख साजिद साहब, सरवर दबीरी साहब, मुन्तजिर लखनवी साहब , वक़ार लखनवी साहब, वसी सल्लामऊ समेत कई मशहूर और मारूफ शायरों ने शिरकत की। इस दौरान जहां बाज़रिए क़ुरांअदाजी गहवारा ए शहज़ादे अली असगर तक्सीम किए गए वही इस मौके पर जश्न-ए-शीरख्वार-ए-कर्बला अवार्ड मर्सिया ख्वान-ए-अहले बैत मुईज़ अब्बास सल्लामऊ को दिया गया।
महफिल को मौलाना सय्यद अली मुतक़्की ज़ैदी साहब ने खिताब किया।



