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शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने हुसैनाबाद ट्रस्ट के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई की
ज़की भारतीय
लखनऊ, 26 सितंबर। प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने आज जुमे की नमाज के बाद लखनऊ की आसिफी मस्जिद में हुसैनाबाद ट्रस्ट के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की अगुवाई की, जहां ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार, ट्रस्ट संपत्तियों की लूट और जमीन पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाए गए। प्रदर्शन में सैकड़ों शिया समुदाय के लोग शामिल हुए, जो ट्रस्ट की नीतियों के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मौलाना ने सभा को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के चेयरमैन और प्रशासन की आलोचना की, उन्होंने अपने बयान में कहा की हुसैनाबाद ट्रस्ट की करोड़ों रुपए की जमीन को अनाथालय को जिला अधिकारी ने किस नियम के तहत दी? उन्होंने कहा कि ये उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है । उन्होंने कहा कि यह हुसैनाबाद ट्रस्ट मोहम्मद अली शाह की निजी संपत्ति का ट्रस्ट है ,जिसमें नवाबीने अवध यानी कि खासकर वसीखादार , जिनको वजीफा मिलता था उसके मतदाता होते थे और चुनाव होता था। इसमें अध्यक्ष चुने जाते थे और अन्य पदाधिकारी भी नियुक्त किए जाते थे, लेकिन यह चुनाव धीरे-धीरे साजिश के तहत बंद कर दिया गया और जिलाधिकारी को उसका केयरटेकर बनाया गया यानी की अध्यक्ष बनाया गया और एडीएम को उपाध्यक्ष बना दिया गया ,लेकिन जब से डीएम और एडीएम इस मामले में आए तब से आज तक ट्रस्ट की आमदनी का कोई हिसाब किताब नहीं दिया गया ।जबकि उन्होंने पूर्व एडीएम ओ पी पाठक का हवाला देते हुए कहा कि जब तालाबंदी की थी तो उन्होंने कहा था कि रोज़ ट्रस्ट को लाखों रुपए का नक़सान हो रहा है।
उनका कहना था जब उस वक्त लाखों का नुकसान हो रहा था जबकि यह बात बहुत पुरानी थी इस दौर में एक करोड़ और दो करोड़ से ऊपर की संपत्ति से आमदनी आती हैऔर उसके बाद भी कोई ऐसी कमेटी नहीं बनाए हैं जिससे शिया संप्रदाय को या नवाबीने अवध को या और जिम्मेदारों को यह पता चले कि आने वाला पैसा किस-किस मध्य में खर्च हो रहा है ।उन्होंने अपने बयान में कहा की हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति को जो अनाथालय को डीएम ने दिया है ,उनका क्या अधिकार था ? क्या यह संपत्ति उनकी अपनी निजी थी ? या सरकार की संपत्ति थी ,जो उन्होंने संपत्ति डोनेट कर दी। उन्होंने कहा कि अगर उनको देना है तो अपना निजी घर या डीएम आवास दे दे ,कोई एतराज नहीं है । लेकिन यह करना उनका गलत है । उन्होंने अपने बयान में कहा कि अगर यही कार्य प्रणाली रहेगी तो हमारा धरना प्रदर्शन जारी रहेगा और रोज अंजुमने उसी स्थल पर धरना देगी जो जमीन अनाथालय को दी गई है । रोज एक अंजुमन वहां पर धरना देगी। मौलाना ने प्रदर्शन के माध्यम से विरोध जताया कि “ट्रस्ट की मनमानी वक्फ की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रही हैं और दलालों के माध्यम से लूट जारी है।” यह प्रदर्शन वक्फ संशोधन बिल और ट्रस्ट की प्रबंधन संबंधी लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के संदर्भ में हुआ है, जहां पहले भी मौलाना ने ट्रस्ट की आलोचना की थी। पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रदर्शन के बाद एक बैठक बुलाई गई, जहां आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। यह घटना लखनऊ में धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर बढ़ते विवाद को उजागर करती है, जो शिया समुदाय की विरासत को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये आरोप सही साबित हुए, तो ट्रस्ट में बड़े बदलाव की जरूरत पड़ेगी। प्रदर्शन से शहर में तनाव बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन ने बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है।हालांकि मौलाना ने एडीएम को ज्ञापन देकर अपना रुख रखा है।
आइए समझते है ,डीएम के अधिकार पर क्यों उठाए शिया समुदाय ने सवाल?
हुसैनाबाद ट्रस्ट, जो कि नवाब मोहम्मद अली शाह द्वारा 1838 में स्थापित किया गया था, वर्तमान में प्रशासनिक विवाद के कारण चर्चा में है। ट्रस्ट की करोड़ों रुपये की संपत्ति, जिसमें इमामबाड़े और आसपास की भू-भूमि शामिल है, को लेकर शिया समुदाय और स्थानीय नागरिक डीएम (जिलाधिकारी) के निर्णयों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
हुसैनाबाद ट्रस्ट: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हुसैनाबाद ट्रस्ट का निर्माण नवाब मोहम्मद अली शाह ने किया था। इसका उद्देश्य शिया समुदाय की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भलाई सुनिश्चित करना था। ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाली संपत्ति का इस्तेमाल गरीबों की सहायता, धार्मिक यात्राओं जैसे कर्बला ज़ियारत और हज के लिए, तथा धार्मिक आयोजनों के संचालन में किया जाता था।
ट्रस्ट की स्थापना के समय से ही यह स्पष्ट था कि ट्रस्ट की संपत्तियां केवल शिया संप्रदाय के धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए ही उपयोग की जाएँगी। इसमें गरीब मोमिनीन की मदद, धार्मिक कवि-संगोष्ठियों का आयोजन और इमामबाड़ों की देखभाल शामिल थी।
चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक नियंत्रण
अवध के नवाबी दौर में हुसैनाबाद ट्रस्ट का प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी था। ट्रस्ट के अध्यक्ष और अन्य पदों के लिए चुनाव होते थे, जिनमें नवाबी खानदान और समुदाय के प्रतिष्ठित लोग वोट डालते थे। चुनाव के माध्यम से ही अध्यक्ष और जनरल सेक्रेटरी चुने जाते थे।
समय के साथ यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद कर दी गई और वर्तमान में जिलाधिकारी को ट्रस्ट का केयरटेकर नियुक्त कर दिया गया है। केयरटेकर का कार्य केवल ट्रस्ट की संपत्तियों का देखभाल और संचालन करना होता है, लेकिन उसका अधिकार संपत्ति को बेचने या किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित करने का नहीं है।
डीएम द्वारा अवैध हस्तक्षेप का आरोप
हाल ही में यह विवाद तब उभरा जब यह आरोप लगाया गया कि वर्तमान डीएम ने हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति को अनाथालय को आवंटित किया। यह कदम शिया समुदाय और ट्रस्ट समर्थकों के अनुसार अवैध और असंवैधानिक है। उनका कहना है कि डीएम के पास केवल केयरटेकर के रूप में अधिकार है, लेकिन मालिकाना अधिकार नहीं।
शिया समुदाय के नेताओं का कहना है कि डीएम ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ट्रस्ट की संपत्तियों का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हुसैनाबाद ट्रस्ट की भूमि नवाब मोहम्मद अली शाह की संपत्ति है और नवाबी वसीयत और ट्रस्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार इसे केवल धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए ही उपयोग किया जा सकता है।
शिया समुदाय की प्रतिक्रिया
शिया समुदाय ने इस फैसले के खिलाफ व्यापक विरोध शुरू कर दिया है। मौलाना कल्बे जव्वाद और अन्य धर्मगुरुओं के नेतृत्व में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि ट्रस्ट की संपत्ति को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया, तो यह नवाबी वसीयत और शिया समुदाय के हितों के खिलाफ होगा।
समुदाय ने यह भी जोर देकर कहा कि डीएम को केवल केयरटेकर के रूप में काम करना चाहिए और ट्रस्ट की संपत्ति पर कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस अवैध हस्तक्षेप को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ट्रस्ट के उद्देश्य की अवहेलना
हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति का मूल उद्देश्य गरीबों की मदद, धार्मिक यात्राओं, कर्बला और हज के लिए शिया समुदाय की सहायता करना था। इसके अलावा, ट्रस्ट का इस्तेमाल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी किया जाना था।
समुदाय का आरोप है कि डीएम द्वारा संपत्ति का अन्यत्र हस्तांतरण इन मूल उद्देश्यों की अवहेलना है। ट्रस्ट की संपत्ति का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए समुदाय ने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
ट्रस्ट समर्थकों का कहना है कि कानून के अनुसार, केवल मालिक ही संपत्ति को किसी अन्य संस्था को दे सकता है। केयरटेकर का यह अधिकार नहीं है कि वह ट्रस्ट की जमीन को किसी अन्य संस्था को आवंटित करे।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रस्ट की संपत्ति पर डीएम का अधिकार केवल संचालन और देखभाल तक सीमित है। इसे किसी अन्य सामाजिक या धार्मिक संस्था को आवंटित करना न्यायसंगत नहीं है।
आगामी कदम और आंदोलन
शिया समुदाय ने यह स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा केवल वर्तमान डीएम तक सीमित नहीं है। यह ट्रस्ट की स्वतंत्रता, नवाबी वसीयत और शिया समुदाय के अधिकारों का मामला है।
विरोध प्रदर्शन अगले कुछ महीनों तक जारी रहने की संभावना है। समुदाय के नेता प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ट्रस्ट की संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता और मूल उद्देश्यों की रक्षा की जाए।
हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति नवाब मोहम्मद अली शाह द्वारा स्थापित वैध धार्मिक और सामाजिक संपत्ति है। डीएम का केवल केयरटेकर के रूप में कार्य करना, लेकिन संपत्ति को किसी अन्य संस्था को देने का अधिकार नहीं होना, शिया समुदाय की चिंता का मुख्य कारण है।
समुदाय का यह आंदोलन इस बात पर जोर देता है कि ट्रस्ट की संपत्ति का उपयोग केवल उसके मूल उद्देश्यों के लिए होना चाहिए और प्रशासनिक हस्तक्षेप को नियंत्रित किया जाना चाहिए। अगर प्रशासन ने इस अवैध हस्तक्षेप को नहीं रोका, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
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