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लखनऊ के भीषण जाम ने थामी आवागवम की रफ्तार,अतिक्रमण ने बढ़ाई मुश्किलें – फ्लाईओवर निर्माण व कठोर कानून की मांग तेज़
लखनऊ,17 अक्टूबर। नवाबों का शहर अब जाम का शहर बन चुका है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगमन से गोमती नगर और हजरतगंज क्षेत्र में भीषण जाम लग गया, जिससे सैकड़ों वाहन घंटों फंसे रहे। एयरपोर्ट से शहर केंद्र तक का सफर सामान्यतः 30 मिनट का होता है, लेकिन जाम के कारण यह दो घंटे से अधिक खिंच गया।
पुराने लखनऊ के नखास, चौक, आलमबाग, बालागंज, डालीगंज और मवैय्या जैसे इलाकों में स्थिति और भी खराब रही, जहां संकरी गलियों में ई-रिक्शा, घुमंतू ठेले वाले, खुनचे वाले दुकानदारों के अतिक्रमण ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। नखास चौराहे पर ई-रिक्शा के झुंड सड़क पर यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया।
शहर की मुख्य सड़कों पर सुबह 9 बजे से ही जाम शुरू हो गया था। गोमती नगर के लोहिया पथ और विभूति खंड में वीआईपी मूवमेंट के कारण डायवर्शन लगाए गए, लेकिन ट्रैफिक पुलिस की कमी से अव्यवस्था फैल गई। एक ऑटो चालक ने बताया, “हम लोग सुबह 8 बजे निकले थे, लेकिन हजरतगंज पहुंचने में दो घंटे लग गए। ई-रिक्शा वाले चौराहों पर खड़े होकर फोन चलाते रहते हैं, कोई कार्रवाई नहीं होती।” हजरतगंज क्रॉसिंग से चारबाग तक की सड़कें ब्लॉक हो गईं, जहां दुकानदारों ने फुटपाथ पर सामान सजाकर सड़क घेर ली।
पुराने इलाकों में हालात नर्क जैसे हैं। नखास चौक से चरक चौराहे तक ई-रिक्शा की हजारों संख्या में घुसपैठ हो गई है। लखनऊ चौकी के ठीक सामने बाजार में दुकानदार 20-20 फीट सड़क पर सामान फैलाते हैं, जबकि पुलिस चुपचाप तमाशा देखती है। आलमबाग में टेढ़ी पुलिया पर घुमंतू ठेले वाले और खुचे वाले अपनी दुकानें सड़क पर सजा लेते हैं, जिससे एम्बुलेंस तक फंस जाती है। बालागंज की संकरी गलियों में ई-रिक्शा पार्किंग ने बाजार को ठप कर दिया, जबकि डालीगंज रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज के बावजूद जाम लगता रहता है। मवैय्या और विशाल खांड जैसे क्षेत्रों में फुटपाथों पर स्थायी अतिक्रमण बने हुए हैं।
चरक चौराहे से एवरेडी चौराहे तक ठेले वालों का कब्जा है, जो पुलिस आने पर वक्ती हटा लेते हैं , लेकिन रिश्वत की डील होते ही फिर वापसी हो जाती है।
तुलसीदास मार्ग और विक्टोरिया स्ट्रीट पर योगी सरकार के बुलडोजर ने एक समय अवैध निर्माण हटाए थे, लेकिन आज हालात वही हैं। हाजी साहब की मशहूर मिठाई दुकान वाला चौराहा, जहां कभी नामोनिशान मिटा दिया गया था, अब फिर अतिक्रमण से भरा पड़ा है। घुमंतू दुकानदारों – ठेले वाले, खुनचे वालों – ने सड़कों पर स्थायी ठिकाने बना लिए हैं। इनका कोई परमानेंट स्थान नहीं, लेकिन वे चौराहों पर झुंड लगाकर खड़े रहते हैं। व्यापारियों ने संयुक्त रूप से पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, जिसमें ई-रिक्शा पर पाबंदी, अतिक्रमण हटाओ अभियान की मांग की।
जाम के कारण एम्बुलेंस देरी से पहुंच रही हैं, स्कूल बसें लेट हो रही हैं। एक मरीज के परिजन ने बताया, “आलमबाग से सिविल अस्पताल पहुंचने में 45 मिनट लग गए, जहां सामान्यतः 15 मिनट का रास्ता है।” विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लाईओवर निर्माण जरूरी है। आलमबाग-कैंट फ्लाईओवर प्रस्तावित है, जो डेढ़ लाख लोगों को राहत देगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कठोर कानून बनाना चाहिए
अतिक्रमणकारियों पर 6 महीने जमानत न मिले, लंबी पेनल्टी लगे। ई-रिक्शा पर सुपर पाबंदी, घुमंतू ठेले वालों व खुनचे वालों के लिए अलग स्थान, ट्रैफिक सेंस के लिए जागरूकता अभियान चले। नगर निगम व पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसे, वरना करोड़ों खर्च के बाद भी जाम लौट आता है। यदि योगी जी स्वयं पुराने लखनऊ का निरीक्षण करें, तो समस्या की जड़ समझ आएगी। बिना निर्णायक कदम के शहरवासियों को जाम से छुटकर मुश्किल है।
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