ज़की भारतीय
लखनऊ, 28 मई । उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जहां एक ओर अवैध कब्जेदारों से सरकारी जमीनों को मुक्त कराने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है, वहीं इस अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सुबह से शाम तक प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), और अन्य विभाग मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों पर चलाए जा रहे इस महाअभियान में तत्परता से जुटे नजर आ रहे हैं। बुलडोजरों की गड़गड़ाहट और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयाँ लखनऊ के विभिन्न हिस्सों में देखी जा सकती हैं। लेकिन इस सख्ती के बीच, कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों का खेल भी बदस्तूर जारी है।इसी कड़ी में, लखनऊ के दुबग्गा क्षेत्र में बेबी मार्टिन स्कूल के सामने एक सरकारी तालाब की जमीन पर कई दिनों से अवैध प्लॉटिंग और पाटने का कार्य चल रहा है। यह तालाब, जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, भूमाफियाओं के निशाने पर है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस तालाब को अवैध रूप से पाटकर उस पर प्लॉटिंग की जा रही है, और इस कार्य में कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह गैरकानूनी गतिविधि तब सामने आई, जब इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो ने स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का ध्यान खींचा, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब न तो स्थानीय प्रशासन और न ही संबंधित विभागों के पास है।
क्षेत्रीय पुलिस के संज्ञान में नहीं है मामला
जब इस अवैध कब्जे के खिलाफ क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों से बातचीत की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला अभी तक प्रकाश में नहीं आया है। यह जवाब तब और भी चौंकाने वाला है, जब यह गतिविधि कई दिनों से चल रही है और वीडियो के वायरल होने के बाद भी पुलिस की ओर से कोई जाँच या कार्रवाई शुरू नहीं हुई। यह सवाल उठता है कि क्या स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर इस मामले में जानबूझकर उदासीनता बरती जा रही है?
घटनास्थल पर संवाददाता की जाँच: प्रॉपर्टी डीलर गायब, मजदूरों ने साधी चुप्पी
हमारे संवाददाता ने जब घटनास्थल पर पहुँचकर ये बात जाननी चाही ,क्या यह कार्य सरकारी जमीन पर हो रहा है या यह निजी संपत्ति है, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। इसका कारण यह रहा कि घटनास्थल पर अवैध रूप से सरकारी जमीन पर कब्जा करके प्लॉटिंग करने के मूड में प्रॉपर्टी डीलर मौजूद नहीं थे। वहाँ मौजूद मजदूरों ने इस संबंध में कोई भी जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। मजदूरों का कहना था, “अभी तक स्वामी लोग नहीं आए हैं, हमें इसके बारे में कुछ नहीं पता।” यह स्थिति स्पष्ट करती है कि अवैध प्लॉटिंग का यह खेल सुनियोजित ढंग से चल रहा है, और इसमें शामिल मुख्य लोग जानबूझकर सामने नहीं आ रहे हैं।
दुबग्गा में अवैध प्लॉटिंग का इतिहास
दुबग्गा, जो लखनऊ के जोन-7 के अंतर्गत आता है, पहले भी अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण के लिए चर्चा में रहा है। हाल ही में, 22 मई 2025 को, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने डुबग्गा और काकोरी में 40 बीघा क्षेत्र में फैली 5 अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया था, जिसमें सड़कें, नालियाँ, बाउंड्रीवाल, और साइट ऑफिस शामिल थे। इस कार्रवाई को एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर जोन-3 और जोन-7 की टीमों ने अंजाम दिया था। लेकिन बेबी मार्टिन स्कूल के सामने तालाब की जमीन पर चल रही अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन की चुप्पी चौंकाने वाली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब को पाटने और प्लॉटिंग का काम कई दिनों से चल रहा था, लेकिन इसे तब तक गंभीरता से नहीं लिया गया, जब तक वीडियो वायरल नहीं हुआ।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
योगी सरकार ने अवैध कब्जों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। इसके तहत, पूरे प्रदेश में 68 हजार हेक्टेयर से अधिक सरकारी जमीन को भू-माफियाओं से मुक्त कराया गया है। लखनऊ में भी, एलडीए और जिला प्रशासन ने कई अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमणों को ध्वस्त किया है। उदाहरण के लिए, अकबरनगर में कुकरैल नदी के किनारे 1227 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था। इसके अलावा, तालाबों और जलाशयों को कब्जा मुक्त कराने के लिए राजस्व परिषद ने एक पोर्टल विकसित किया है, जिस पर तालाबों की जानकारी और अतिक्रमण की शिकायतें दर्ज की जाती हैं।लेकिन डुबग्गा के इस तालाब के मामले में प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल उठाती है। क्या स्थानीय अधिकारियों को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी? यदि थी, तो कार्रवाई में देरी क्यों? क्या इसमें कुछ अधिकारियों की मिलीभगत शामिल है? ये सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।तालाबों पर अतिक्रमण की व्यापक समस्याउत्तर प्रदेश में तालाबों और जलाशयों पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या है। राजस्व परिषद के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 6.45 लाख तालाब और जलाशय चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 1556 हेक्टेयर क्षेत्र पर अवैध कब्जे हैं। लखनऊ में भी कई तालाब भूमाफियाओं के निशाने पर हैं। दुबग्गा जैसे क्षेत्रों में, जहाँ शहरीकरण तेजी से हो रहा है, तालाबों को पाटकर अवैध कॉलोनियाँ विकसित करने का चलन बढ़ा है।स्थानीय लोगों की चिंतास्थानीय निवासियों का कहना है कि यह तालाब न केवल जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदाय के लिए भी अहम है। तालाब को पाटने से भूजल स्तर पर असर पड़ सकता है, और बरसात के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “यह तालाब सालों से यहाँ है। अब इसे पाटकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, और कोई रोकने वाला नहीं है। प्रशासन को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।



