ज़की भारतीय ✍🏼
आज भारत में सोशल मीडिया एक ऐसा मैदान बन गया है, जहाँ नफरत की आग तेजी से फैल रही है। एक तरफ कट्टर हिंदू संगठनों द्वारा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लंबी आयु और इजरायल की सफलता के लिए हवन-पूजा करना, दूसरी तरफ ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या पर खुशी जताते हुए उनकी तस्वीरों पर अपमानजनक कृत्य (जैसे गुजरात के अहमदाबाद में एक हिंदुत्व कार्यकर्ता द्वारा तस्वीर पर पेशाब करना) – ये घटनाएँ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ये सिर्फ व्यक्तिगत हरकतें नहीं, बल्कि एक सोची-समझी मानसिकता का हिस्सा लगती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को भारत के घरेलू सांप्रदायिक तनाव से जोड़ रही है।
ऐसी हरकतें समाज में गहरी दरार पैदा कर रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या भारत में अब कोई धार्मिक नेता या शख्सियत शहीद हो जाए, तो उसके खिलाफ पुतला जलाना, अपमानजनक कमेंट्स या ऐसी हरकतें सामान्य हो जाएंगी? क्या ये लोग जानबूझकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ना चाहते हैं, ताकि अराजकता फैले? ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सोशल मीडिया पर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण पहले से ही चरम पर है, और ऐसी घटनाएँ हिंसा की ओर धकेल सकती हैं।
संभल में पुलिस अधिकारी का विवादास्पद बयान: निष्पक्षता पर सवाल
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल ही में अलविदा जुम्मे और ईद-उल-फित्र की तैयारियों के लिए पीस कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में सर्कल ऑफिसर (सीओ) कुलदीप कुमार ने ईरान-इजरायल युद्ध का जिक्र करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग ईरान के लिए “छाती पीट रहे हैं” या दुख मना रहे हैं, वे जहाज में बैठकर ईरान जाएँ और वहाँ जाकर लड़ें। उन्होंने नमाज मस्जिद के अंदर पढ़ने की सलाह दी और बाहर नमाज पढ़ने या नारेबाजी करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
उनके शब्द थे: “बहुत सारे लोगों को खुजली मची है… अगर इतनी दिक्कत है तो जहाज में बैठ जाओ, ईरान जाओ और लड़ो, लौट के आ जाओ।” साथ ही, सोशल मीडिया पर ऐसे रील्स बनाने वालों को भी चेतावनी दी कि “रील बनाओगे तो रील बना देंगे।”
यह बयान वायरल होने के बाद विवाद का विषय बना। AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी, समाजवादी पार्टी के विधायक इकबाल महमूद और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे धमकी भरा और पक्षपाती बताया। संभल के एसपी ने सीओ से स्पष्टीकरण मांगा। सवाल यह hai कि एक पुलिस अधिकारी को अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर ऐसी भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया? पुलिस का काम निष्पक्षता से कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी समुदाय को टारगेट करना।

दोहरे मापदंड: एक तरफ समर्थन, दूसरी तरफ विरोध
श्रीलंका में अगर कोई हिंदू मारा जाता है, तो भारत में हिंदू समुदाय अगर छाती पीटता है तो कार्रवाई की मांग भी करता है। सोशल मीडिया पर प्रदर्शन, कमेंट्स और धरने लगते हैं। लेकिन क्या किसी मुस्लिम संगठन या अधिकारी ने कभी कहा कि “श्रीलंका जाओ, वहाँ लड़ो”? नहीं।
इसी तरह, पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार की खबरों पर भारत में बड़े प्रदर्शन होते हैं, सीएए जैसे कानून बनते हैं, और हिंदुओं को शरण देने की बात होती है। यह जज्बा स्वाभाविक है – एक धर्म के लोग एक-दूसरे के दुख में साथ देते हैं। मुस्लिम समुदाय ने कभी इसका विरोध नहीं किया, क्योंकि धर्म की एकता का सम्मान करना चाहिए।
फिर ईरान में आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या पर मुस्लिमों का शोक और प्रदर्शन क्यों कुछ हिंदू कट्टरपंथियों को आपत्तिजनक लगता है? अगर हिंदू पाकिस्तान या श्रीलंका के हिंदुओं के लिए दर्द महसूस करते हैं, तो मुस्लिम ईरान के शिया भाइयों के लिए क्यों नहीं? संयम और सहानुभूति दोनों तरफ जरूरी है। एक तरफ नेतन्याहू के लिए हवन (जैसे संभल में संतन सेवा संघ द्वारा किया गया), दूसरी तरफ खामेनेई की तस्वीर पर अपमान – यह दोहरा रवैया समाज में अविश्वास पैदा करता है।
सोशल मीडिया पर नफरत की आग और इसका असर
सोशल मीडिया पर ये वीडियो और पोस्ट तेजी से फैलते हैं। कुछ कट्टर हिंदू संगठन इजरायल-अमेरिका के नेताओं का समर्थन दिखाते हैं,जबकि मुस्लिम समुदाय ईरान के लिए शोक मनाता है। लेकिन जब अपमान की हद पार हो जाती है, जैसे तस्वीर पर पेशाब करना, तो यह सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाता, बल्कि हिंसा भड़काने का काम करता है।कई लोग मानते हैं कि ये हरकतें जानबूझकर की जा रही हैं ताकि भारत में कानून-व्यवस्था बिगड़े, अराजकता फैले। अगर कोई बड़ा धार्मिक नेता या शख्सियत पर ऐसी हरकतें होती हैं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
भारत में अधिकांश हिंदू और मुस्लिम सेकुलर हैं। वे गंगा-जमुनी तहजीब चाहते हैं – होली-दिवाली में मुस्लिम शामिल होते हैं, ईद-मुहर्रम में हिंदू। यही भारत की असली ताकत है। लेकिन सोशल मीडिया पर फैल रही नफरत, कट्टरपंथी बयान और दोहरे मापदंड इस सद्भाव को खतरे में डाल रहे हैं। सरकार, पुलिस और समाज को मिलकर काम करना होगा,कानून का सख्ती से पालन बिना भेदभाव करने के साथ साथ नफरत फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी,संवाद बढ़ाना, सहानुभूति सिखाना होगा,पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष रहने की ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी तभी भारत मजबूत, एकजुट और अमनपूर्ण रहेगा।नफरत की आग बुझानी होगी, वरना जल्द ही ग्रहयुद्ध जैसी स्थिति आ सकती है। संयम, समझ और भाईचारा ही रास्ता है।



