लखनऊ,10 अक्टूबर। लखनऊ के एमिटी यूनिवर्सिटी कैंपस में एक 20 वर्षीय छात्रा अक्षिता उपाध्याय ने कथित तौर पर जहर खा लिया, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई। यह घटना 10 जनवरी 2025 को हुई, जब अक्षिता ने अपने हॉस्टल रूम में फंदा लगाकर आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन जहर के सेवन से पहले ही बेहोश हो गई। छात्रा ने सुसाइड नोट में लिखा, “मैंने अपनी वजह से सब कुछ खराब किया है। मम्मी-पापा, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन आप मुझसे बेहतर बेटी डिजर्व करते हैं। मैं अपनी वजह से सबको तकलीफ दे रही हूं। कृपया किसी को जिम्मेदार मत ठहराना। हो सके तो मुझसे नफरत मत करना।” नोट के अंत में उसने लिखा, “I LOVE U..’R'”। अक्षिता मथुरा की रहने वाली थी और बीए एलएलबी के द्वितीय वर्ष की छात्रा थी।
परिवार और दोस्तों के अनुसार, अक्षिता यूनिवर्सिटी प्रशासन पर शोषण और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगा रही थी। वह पढ़ाई के दौरान क्लासमेट राज गौरव यादव से दोस्ती हुई, जिसने धीरे-धीरे उसकी निजी तस्वीरें लीं और पैसे की मांग शुरू कर दी। आरोपी ने ब्लैकमेलिंग की, पीड़िता के बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन पर कब्जा कर लिया। अक्षिता ने रेप और एसिड अटैक की धमकियां भी प्राप्त कीं, जिससे वह गहरे अवसाद में चली गई। चिनहट थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है और आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 354A (सेक्शुअल हैरासमेंट) और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है।
यह घटना एमिटी यूनिवर्सिटी के लिए एक और झटका है। सितंबर 2025 में ही एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें द्वितीय वर्ष के लॉ छात्र शिखर मुकेश केसवानी को क्लासमेट्स ने कार के अंदर 50-60 थप्पड़ मारे थे। वीडियो 101 सेकंड का था, जिसमें आरोपी आयुष यादव, जानवी मिश्रा, मिलाय बनर्जी, विवेक सिंह और आर्यमन शुक्ला नामक छात्र दिखे। पीड़िता के पिता ने पांचों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। यूनिवर्सिटी ने जांच कमिटी गठित की, लेकिन छात्रों ने रैगिंग और बुलिंग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यूजीसी ने जनवरी 2025 में चेतावनी दी थी कि रैगिंग के मामलों में प्रिंसिपल और रजिस्ट्रार जिम्मेदार होंगे।
अक्षिता को तुरंत केजीएमयू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई गई। डॉक्टरों ने कहा कि जहर के प्रभाव से उसके किडनी और लिवर प्रभावित हो गए हैं। परिवार ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया, कहा कि शोषण की शिकायतें पहले भी की गई थीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एमिटी प्रशासन ने बयान जारी कर कहा, “हम छात्र कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं और मामले की पूरी जांच करेंगे।” यह घटना निजी यूनिवर्सिटीज में छात्र सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है, जहां उच्च फीस के बावजूद सुरक्षा और काउंसलिंग की कमी है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की पूछताछ जारी है।



