लखनऊ,14 मई । कांग्रेस पार्टी ने आज दिल्ली में आयोजित एक बैठक के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर फिर से तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार बिना जनता और संसद को विश्वास में लिए विदेशी घोषणाओं पर निर्भर है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी पार्टी आतंकवाद के खिलाफ चट्टान की तरह अडिग है। हमने हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार बिना संसद और जनता को भरोसे में लिए गंभीर मुद्दों पर विदेशी मंचों से घोषणाएं करवा रही है।”उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरतनी चाहिए और तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि हाल में हुई सर्वदलीय बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी शामिल नहीं हुए, जिसे उन्होंने सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाने वाला बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की है।दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, ताकि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले, उसके बाद शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’, और हालिया भारत-पाकिस्तान सीजफायर जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो सके। खरगे ने अपने पत्र में लिखा, “राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता के लिए यह जरूरी है कि संसद में सभी दलों की राय सुनी जाए और सामूहिक संकल्प प्रदर्शित किया जाए। कांग्रेस ने आज दिल्ली में जो उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की, उसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, शशि थरूर, अजय माकन, अंबिका सोनी और जयराम रमेश सहित 23 वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर की घोषणा में अमेरिका की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। पार्टी ने खास तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर की घोषणा और उनके कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के दावों पर कड़ा ऐतराज जताया।कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा, “यह चौंकाने वाला है कि भारत-पाकिस्तान जैसे द्विपक्षीय मुद्दे पर अमेरिका की ओर से घोषणाएं हो रही हैं। यह शिमला समझौते की भावना के खिलाफ है। सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।”पार्टी ने यह भी घोषणा की कि राहुल गांधी 16 मई 2025 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे, जिसमें वे इन मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने शिमला समझौते को दरकिनार कर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार किया है। जयराम रमेश ने कहा, “अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के ‘तटस्थ स्थल’ पर बातचीत के बयान ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या भारत अपनी द्विपक्षीय नीति से पीछे हट रहा है?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। इसके बाद सीमा पर तनाव बढ़ा और 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा हुई, जिसे सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में उजागर किया।कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय एकता और पारदर्शिता के लिए संसद में चर्चा का विषय बनाने की मांग की है।



