लखनऊ, 23 मई। भारत ने आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर जवाबदेह ठहराने के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में दोबारा शामिल करने की रणनीति तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने हाल के पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद ठोस सबूत जुटाए हैं, जो पाकिस्तान में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों की गतिविधियों को उजागर करते हैं।
जानकारों के अनुसार, भारत अगले FATF प्लेनरी सत्र में पाकिस्तान के खिलाफ सबूत पेश करेगा, जिसमें आतंकी ठिकानों और वित्तपोषण के दस्तावेज शामिल हैं। भारत का दावा है कि पाकिस्तान ने 2022 में ग्रे लिस्ट से हटने के बाद अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और आतंकवाद को वित्तीय मदद जारी है। एक हिंदी समाचार पत्र के अनुसार, भारत विश्व बैंक और IMF जैसे संगठनों से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता का भी विरोध करेगा, क्योंकि इन फंड्स के दुरुपयोग की आशंका है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने FATF के इंटरनेशनल कोऑपरेशन रिव्यू ग्रुप मैकेनिज्म को सक्रिय करने की योजना बनाई है, ताकि पाकिस्तान की AML/CFT (एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग/काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग) नीतियों की दोबारा जाँच हो।पाकिस्तान को 2018 से 2022 तक ग्रे लिस्ट में रखा गया था, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को 38 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। यदि पाकिस्तान फिर से ग्रे लिस्ट में शामिल होता है, तो उसे विदेशी निवेश में कमी, सख्त वित्तीय जाँच और क्रेडिट रेटिंग में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। भारत की यह रणनीति न केवल आर्थिक दबाव बनाएगी, बल्कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर करेगी। यह खबर लखनऊ और उत्तर प्रदेश में भी चर्चा का विषय बनी, क्योंकि स्थानीय लोग इसे भारत की कूटनीतिक जीत के रूप में देख रहे हैं।



