HomeUncategorizedबराही सादात में आज मजलिस-ए-अज़ा व जुलूस-ए-अलम-ए-मुबारक का होगा आयोजन

बराही सादात में आज मजलिस-ए-अज़ा व जुलूस-ए-अलम-ए-मुबारक का होगा आयोजन

लखनऊ, 19 जून। मोहर्रम की शुरुआत होते ही हिंदुस्तान के लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के ग़म में मजलिसों, मातम और अज़ादारी का सिलसिला जारी है। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) का ग़म केवल हिंदुस्तान और पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में उनकी शहादत की याद मनाई जाती है। अलग-अलग मुल्कों और समुदायों में अज़ादारी के तरीके भले अलग हों, लेकिन इमाम हुसैन (अ.स.) की मोहब्बत और उनका ग़म हर दिल में मौजूद है।
मोहर्रम का महीना आते ही कर्बला की वह दर्दनाक दास्तान ताज़ा हो जाती है, जब हक़ और इंसाफ़ की राह में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके अहलेबैत ने बेमिसाल कुर्बानियां पेश कीं। इसी याद में कहीं मजलिसें आयोजित की जाती हैं, कहीं मातमी जुलूस निकाले जाते हैं, तो कहीं ताबूत और अलम बरामद कर अपने ग़म का इज़हार किया जाता है।
इसी सिलसिले में अंजुमन-ए- मासूमिया बराही सादात, संडीला (जिला हरदोई) की ओर से आज 3 मोहर्रम 1448 हिजरी को दरगाह हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम, बराही सादात में मजलिस-ए-अज़ा व जुलूस-ए-अलम-ए-मुबारक का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम रात 8 बजे शुरू होगा।
कार्यक्रम का आगाज़ तिलावत-ए- क़ुरआन-ए-पाक से होगा, जिसके बाद मौलाना ज़ियारत हुसैन साहब मजलिस को ख़िताब फरमाएंगे। वहीं मशहूर नौहाख़्वां फ़रमान हैदर जंगीपुरी अपने मक़सूस अंदाज़ में नौहाख़्वानी पेश करेंगे।
आयोजकों के अनुसार इस अवसर पर अंजुमन-ए-मजलूमिया गौरी ख़ालसा मेहमान अंजुमन के रूप में शामिल होगी, जबकि मेज़बानी के फ़राइज़ अंजुमन-ए-मासूमिया बरही सादात, संडीला अंजाम देगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अज़ादारों की शिरकत की उम्मीद जताई जा रही है।

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