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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुककर भारत के हितों की दी कुर्बानी:राहुल गांधी

लखनऊ, 22 मई । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज, लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुककर भारत के हितों की कुर्बानी दी। यह बयान ट्रंप द्वारा भारत पर 26% टैरिफ और शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी को निमंत्रण न देने जैसे मुद्दों के संदर्भ में था।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और उनसे सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारत के हितों की कुर्बानी क्यों दी गई।
उनके इस बयान ने भारतीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसके बाद सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने अपने भाषण में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच संबंधों पर तंज कसते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति कमजोर दिखाई देती है जब बात ट्रंप जैसे नेताओं के साथ सौदेबाजी की आती है। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 26% टैरिफ (जवाबी शुल्क) के मुद्दे को उठाया, जिसे ट्रंप ने हाल ही में लागू करने की बात कही थी। राहुल ने कहा, “ट्रंप के सामने झुककर भारत के हितों की कुर्बानी क्यों दी? हमें अपनी ताकत और जरूरतों को समझना चाहिए। हमें उन क्षेत्रों में समझौता नहीं करना चाहिए जो हमारे लिए हानिकारक हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत में एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की कमी के कारण विदेश नीति में कमजोरी आती है, और सरकार को इस दिशा में स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।राहुल ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस पार्टी इंदिरा गांधी के समय से विदेश नीति में मजबूती के साथ काम करती रही है, जबकि बीजेपी का इतिहास “झुकने” का रहा है। उन्होंने कहा, “ट्रंप को टैरिफ ढांचा बदलने का पूरा अधिकार है, लेकिन भारत को भी मजबूती से बातचीत कर एक अच्छा सौदा हासिल करना चाहिए।

राहुल गांधी का यह बयान मुख्य रूप से डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले के संदर्भ में था, जिसमें उन्होंने भारत सहित कई देशों पर 26% जवाबी शुल्क लगाने की बात कही थी। यह टैरिफ व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए प्रस्तावित किया गया था, जिसका भारत के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, राहुल ने उन खबरों का भी जिक्र किया जिनमें दावा किया गया था कि ट्रंप ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी को आमंत्रित नहीं किया था, जिसे उन्होंने भारत की कूटनीतिक कमजोरी के रूप में पेश किया।राहुल ने यह भी कहा कि भारत को चीन की तरह एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्रणाली विकसित करनी चाहिए ताकि वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति मजबूत हो। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ट्रंप जैसे नेताओं के साथ बातचीत में भारत के हितों को ठोस तरीके से नहीं रख पाती।

राहुल गांधी ने क्यों उठाया यह मुद्दा?

राहुल गांधी का यह बयान कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला, वे भारत की विदेश नीति और आर्थिक हितों को लेकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाना चाहते हैं। दूसरा, ट्रंप और मोदी के बीच की तथाकथित “दोस्ती” को लेकर पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है, जैसे कि 2019 में “हाउडी मोदी” और 2020 में “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम। राहुल ने इन आयोजनों का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि क्या इन दोस्ताना रिश्तों का फायदा भारत को मिल रहा है या यह सिर्फ दिखावा है।तीसरा, राहुल गांधी का यह बयान विपक्ष की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे सरकार को आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर, जब वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, राहुल ने इसे अवसर के रूप में लिया है।

बीजेपी और सरकार की प्रतिक्रिया

राहुल के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे “राष्ट्र विरोधी” करार देते हुए कहा कि राहुल गांधी विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। एक बीजेपी समर्थक ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ट्रंप के सामने झुकना नहीं, भारत के हित में डील करना था। ‘हाउडी मोदी’ में किसने किसका हाथ थामा था?” दूसरी ओर, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ऐसे मौकों पर कह चुके हैं कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
राहुल गांधी का यह बयान न केवल भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा को तेज करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विपक्ष सरकार की विदेश नीति को लगातार कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के टैरिफ और शपथ ग्रहण समारोह जैसे मुद्दों को आधार बनाकर राहुल ने सरकार पर भारत के आर्थिक और कूटनीतिक हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना है, खासकर जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक चर्चाएं तेज होंगी।

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