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पानी की बूंद बूंद को तरस रहे सिकरौरी निवासी,8 दिनों से पानी का संकट: जलकल विभाग की घोर लापरवाही उजागर

ज़की भारतीय

लखनऊ, 17 दिसंबर । राजधानी लखनऊ के दुबग्गा के आगे सिकरौरी क्षेत्र में पिछले आठ दिनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। घरों में एक बूंद पानी नहीं आ रहा, लोग एक-एक घूंट पानी के लिए तरस रहे हैं। समस्या एक वाल्व खराब होने की है, लेकिन इसे ठीक करने में विभाग की लापरवाही चरम पर है। बार-बार “दो-तीन दिन और लगेंगे” का बहाना बनाकर जनता को टालना विभाग की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि समस्या की शिकायत कई दिनों पहले ही विभाग को दे दी गई थी। फिर भी आज आठवां दिन बीत गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हमारे संवाददाता ने जब जलकल विभाग के जूनियर इंजीनियर (जे.ई.) सुरेंद्र से बात की, तो उन्होंने कहा, “वाल्व हमारे पास उपलब्ध नहीं है, सूचना हाल ही में मिली है, लोग भेजे हैं, अभी कम से कम दो-तीन दिन और लगेंगे।” सवाल यह है कि जब शिकायत तीन दिन पहले की गई थी, तो उन “तीन दिनों” में काम क्यों पूरा नहीं हुआ? आज फिर वही जवाब – “तीन दिन लगेंगे”। इसका मतलब साफ है कि विभाग की लापरवाही दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जनता की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेने के बजाय, बहाने बनाकर समय काटा जा रहा है।
यह क्षेत्र मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर है, यहां भारी ट्रैफिक नहीं है कि रास्ता बंद करने में बड़ी समस्या हो। सिर्फ खोदाई करके वाल्व बदलना है। सामान्य तौर पर ऐसी मरम्मत में खुदाई, वाल्व बदलना और लाइन जोड़ना मिलाकर 2 से 3दिन तो लग ही सकते हैं, लेकिन इसके लिए विभाग को तैयार रहना चाहिए। लेकिन यहां तो 8 दिन बीतने के बाद भी वाल्व “उपलब्ध नहीं” है! इतने बड़े जलकल विभाग में, जो करोड़ों रुपये का पानी टैक्स और बिल वसूलता है, एक छोटे से वाल्व का स्टॉक क्यों नहीं रखा जाता? क्या वाल्व बाहर से स्पेशल ऑर्डर करके मंगवाए जा रहे हैं? लोकल मार्केट में आसानी से मिलने वाली यह चीज स्टॉक में क्यों नहीं है?
जनता से पानी टैक्स, सीवर टैक्स के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले जाते हैं। यह पैसा कहां जाता है? स्पेयर पार्ट्स जैसे वाल्व, पाइप आदि खरीदकर इमरजेंसी स्टॉक रखने में क्यों इस्तेमाल नहीं होता? टेंडर प्रक्रिया में देरी या बजट की कमी का बहाना बनाकर जनता को क्यों सजा दी जा रही है? जलकल विभाग तो नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ही बना है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधा के लिए लोग मोहताज हो गए हैं। क्षेत्र में सरकारी पानी की टंकियां नहीं लगाई गईं, न ही टैंकरों की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं – वे कहां से पानी का इंतजाम करें?
हमारे प्रयासों के बावजूद जलकल विभाग के उच्च अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका। सिकरौरी-दुबग्गा क्षेत्र लखनऊ जलकल विभाग के अंतर्गत आता है, मुख्य कार्यालय ऐशबाग (वाटर वर्क्स रोड) में है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग में प्रिवेंटिव मेंटेनेंस की कोई व्यवस्था है? पुरानी पाइपलाइनों और वाल्वों की नियमित जांच क्यों नहीं होती, ताकि अचानक ब्रेकडाउन न हो? स्टाफ की कमी, फंड की दिक्कत या ब्यूरोक्रेसी की वजह से जनता को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
क्षेत्रवासियों में आक्रोश चरम पर है। उनका कहना है कि यदि समस्या जल्द नहीं सुलझी तो वे बड़े स्तर पर सड़क जाम करके धरना-प्रदर्शन करेंगे। लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त शासन में भी ऐसे बेपरवाह कर्मचारी कैसे बने हुए हैं, यह जनता को हैरान कर रहा है। पानी जैसी जीवनदायिनी सुविधा के साथ इतनी उदासीनता बर्दाश्त से बाहर है।
उम्मीद है कि नगर निगम के उच्च अधिकारी और जलकल महाप्रबंधक इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करेंगे। दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो और सिकरौरी के निवासियों को तत्काल राहत मिले। अन्यथा जनता का गुस्सा फूटना तय है।

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