लखनऊ,29 मई। भारत में कोरोना वायरस एक बार फिर से अपने पैर पसार रहा है। कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नए मामले सामने आ रहे हैं, और बेंगलुरु में हाल ही में एक बुजुर्ग महिला की कोविड-19 से मृत्यु की खबर ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है। लेकिन इस महामारी के बीच एक और डर लोगों के मन में घर कर रहा है—कोरोना वैक्सीन की डोज लेने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स और मौतों का खतरा। सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे हैं कि वैक्सीन, खासकर कोविशील्ड, अचानक होने वाली मौतों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन रही है। आइए, इस मुद्दे की गहराई में जाकर तथ्यों, आशंकाओं और सरकार की नीतियों को समझने की कोशिश करते हैं।
वैक्सीन के बाद मौतों के मामले: कितना सच, कितना डर?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में अचानक होने वाली मौतों, खासकर युवाओं और स्वस्थ लोगों में हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक जैसी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट्स में दावा किया गया है कि ये मौतें कोविशील्ड या कोवैक्सिन जैसी वैक्सीन्स के साइड इफेक्ट्स का नतीजा हैं। उदाहरण के लिए, एक पोस्ट में दावा किया गया कि कोविशील्ड वैक्सीन हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन रही है, और 2100 से ज्यादा शवों के पोस्टमार्टम में ब्रेन स्ट्रोक को मौत का कारण बताया गया।हालांकि, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक स्टडी ने इन दावों को खारिज किया है। 19 राज्यों के 47 अस्पतालों में 1 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2023 के बीच 729 अचानक मृत्यु के मामलों और 2916 हार्ट अटैक से बचे लोगों पर अध्ययन किया गया। इस रिसर्च में पाया गया कि कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम एक या दो खुराक लेने वालों में अचानक मृत्यु का खतरा न केवल बढ़ता नहीं, बल्कि कम होता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि अचानक मौतों का कारण पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, न कि वैक्सीन।
वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स: क्या कहते हैं तथ्य?
वैक्सीन्स के साइड इफेक्ट्स को लेकर कुछ सवाल समय-समय पर उठे हैं। एस्ट्राजेनेका, जिसके फॉर्मूले पर भारत में कोविशील्ड बनी, ने ब्रिटिश कोर्ट में माना कि उनकी वैक्सीन से थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) जैसा दुर्लभ साइड इफेक्ट हो सकता है, जो 10 लाख में से एक मामले में देखा गया। यह स्थिति रक्त के थक्के बनने और प्लेटलेट्स की कमी से जुड़ी है। इसके अलावा, फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना जैसी वैक्सीन्स के बाद मायोकार्डाइटिस (हृदय की मांसपेशियों में सूजन) और पेरिकार्डाइटिस (हृदय की झिल्ली में सूजन) के मामले भी सामने आए हैं, खासकर युवा पुरुषों में।भारत में कोविशील्ड और कोवैक्सिन के टीकाकरण के बाद कुछ मामलों में गंभीर एलर्जी रिएक्शन (एनाफिलैक्सिस) देखे गए। उदाहरण के लिए, 2021 में एक 68 वर्षीय व्यक्ति की वैक्सीन के बाद एनाफिलैक्सिस से मृत्यु हुई थी, जबकि दो अन्य युवा मरीज ठीक हो गए। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गंभीर साइड इफेक्ट्स बेहद दुर्लभ हैं और वैक्सीन्स के फायदे जोखिमों से कहीं ज्यादा हैं। वैक्सीन्स ने अस्पताल में भर्ती होने की दर और मृत्यु दर को कम किया है।
सरकार की नीति और टीकाकरण की अनिवार्यता
भारत सरकार ने हमेशा कहा कि कोविड-19 वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं था, बल्कि स्वैच्छिक था। सरकार ने टीकाकरण को प्रोत्साहित किया, लेकिन इसे जबरदस्ती लागू नहीं किया। टीकाकरण के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों (AEFI) को ट्रैक करने के लिए एक मजबूत सर्विलांस सिस्टम बनाया गया, जिसमें टीका लगने के बाद 30 मिनट तक मॉनिटरिंग और आपातकालीन स्थिति के लिए किट की व्यवस्था शामिल थी। फिर भी, कुछ लोगों का मानना है कि वैक्सीन के खतरों की पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हुईं। 2021 में कोविशील्ड वैक्सीन के बाद दो युवतियों की मृत्यु के मामले में उनके परिजनों ने मुआवजे की मांग की, लेकिन केंद्र ने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए वह जिम्मेदार नहीं है और मुआवजे के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर किया जा सकता है।
लोगों में डर क्यों?
सोशल मीडिया पर अफवाहों और अधूरी जानकारी ने लोगों के मन में डर पैदा किया है। एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि कोवैक्सिन ने “करोड़ों लोगों की मौत” का कारण बना, जिसे फैक्ट-चेक में गलत पाया गया। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के महोबा में एक मृत महिला को वैक्सीन की दूसरी डोज लगने का मैसेज भेजा गया, जिसने सरकारी सिस्टम की लापरवाही को उजागर किया और लोगों का भरोसा डगमगाया। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन्स का व्यापक क्लिनिकल परीक्षण हुआ है और गंभीर साइड इफेक्ट्स दुर्लभ हैं। फिर भी, अचानक होने वाली मौतों को वैक्सीन से जोड़ने की अफवाहें लोगों में भय पैदा कर रही हैं।
डर को हावी न होने देंकोरोना वैक्सीन ने भारत और दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाई है। येल यूनिवर्सिटी के एक सर्वे के अनुसार, वैक्सीन्स ने अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर को कम किया। हालांकि, कुछ दुर्लभ साइड इफेक्ट्स के मामले सामने आए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर टीकाकरण के बाद सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या अन्य गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।सरकार और स्वास्थ्य संगठनों को चाहिए कि वे लोगों में जागरूकता बढ़ाएं, साइड इफेक्ट्स की पारदर्शी जानकारी दें और अफवाहों को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाएं। आम लोगों को भी चाहिए कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञों की सलाह पर ध्यान दें। डर का माहौल बनाना आसान है, लेकिन सच्चाई को समझकर ही हम इस महामारी से पूरी तरह निपट सकते हैं।



