ज़की भारतीय
आमतौर पर देखा गया है कि युद्ध में एक-दूसरे के खिलाफ साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाई जाती है। किसी भी हाल में अपने देश की सुरक्षा के लिए कोई भी देश किसी भी हद तक जा सकता है। लेकिन इराक, इजराइल और अमेरिका के बीच जो जंग शुरू हुई, उसमें इजराइल और अमेरिका ने धोखेबाजी का सहारा लिया। एक तरफ ईरान से तीसरे स्तर की बातचीत तय हो चुकी थी। सूत्रों ने बताया था कि ईरान न्यूक्लियर डील पर भी तैयार हो गया था। ऐसे हालात में धोखे से हमला करना, ईरान को और इस्लाम को बदनाम करके क्रूर शासक कहकर अयातुल्लाह खामेनेई को बदनाम करना, उनके खिलाफ उन्हीं के देश में यहूदियों द्वारा पूर्व रज़ा शाह के समर्थकों को भड़काना, सत्ता परिवर्तन का प्रलोभन देना—यह सब जंग के खिलाफ है।
अक्सर भारत में भी जब मुसलमानों के प्रति ईरान ने बयान दिया तो भारत की ओर से साफ टिप्पणी आई कि यह हमारा आंतरिक मामला है, इसमें हस्तक्षेप न करें। यह सही भी है—किसी के देश में हस्तक्षेप गलत है। यही गलती इजराइल और अमेरिका ने की। धोखे से हमला किया और इसमें कई शीर्ष नेता, फौजी और निर्दोष लोग शहीद हो गए।
आज हम सिर्फ इसी मुद्दे पर बात नहीं करने जा रहे हैं। आज हम ईरान में हुए इस सनसनीखेज आतंकवादी हमले के विरुद्ध रची गई साजिशों को बेनकाब करने का प्रयास करेंगे। जरूरी नहीं कि मेरा लिखा हुआ लेख पूरी तरह सही साबित हो, लेकिन हर लेखक स्वतंत्र है। उसकी अपनी सोच है, अपनी मानसिकता है। वह अपने तरफ से शक जाहिर कर सकता है और यह उसका अधिकार है।
अब बात करते हैं—कौन है वह शख्स जिसने ईरान के ही साथ, ईरान में रहकर देशद्रोह किया और इतनी खतरनाक साजिश को अंजाम दिया? क्या वह ईरान का ही है या किसी बाहरी देश पर काम कर रहा था?
इस दुनिया में कुछ लोगों को छोड़कर हर आदमी की एक क़ीमत होती है,बस आपको ये देखना होता है कि कौन कितने में बिक सकता है? जो ये जान जाता है उसके लिए किसी को भी खरीदना मुश्किल नहीं होता है।
अब बात करते हैं ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कुद्स फोर्स कमांडर ईस्माइल क़ानी की, जिनपर पर लगे आरोप और संदेहों की पूरी कहानी एक गहन और विवादास्पद विषय पर आधारित है। यह संदेह सोशल मीडिया, रील्स, यूट्यूब और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में फैला हुआ है, खासकर हाल के बड़े हमलों के बाद जहां ईरान के कई टॉप लीडर्स मारे गए, लेकिन क़ानी बार-बार बच गए।
ईस्माइल क़ानी: “लकी” कमांडर या संदिग्ध “रोल”?
ईस्माइल क़ानी, 67 वर्षीय ब्रिगेडियर जनरल, 2020 में कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में मौत के बाद कुद्स फोर्स के कमांडर बने। कुद्स फोर्स ईरान की विदेशी प्रॉक्सी ऑपरेशंस (हिजबुल्लाह, हूती, इराकी मिलिशिया आदि) की रीढ़ है। क़ानी अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र के एक्सपर्ट थे, लेकिन सुलेमानी जितने करिश्माई नहीं माने जाते।
फिर भी, कई घटनाओं में उनका “बचना” लोगों को हैरान करता है:
2020: सुलेमानी की मौत – क़ानी उनके डिप्टी थे। सुलेमानी बगदाद एयरपोर्ट पर मारे गए, लेकिन क़ानी उस काफिले में नहीं थे। वे सुरक्षित रहे और जल्दी प्रमोट हो गए।
2024: हसन नसरल्लाह की मौत (सितंबर 2024) – बेरूत में
इज़राइल ने बंकर पर हमला किया, नसरल्लाह मारे गए। रिपोर्ट्स कहती हैं क़ानी पास थे या मीटिंग में थे, लेकिन कुछ मिनट पहले निकल गए। वे बच गए। बाद में उनके गायब होने की अफवाहें फैलीं – कुछ ने कहा इंटरोगेशन में हार्ट अटैक आया, कुछ ने कहा वे “ट्रेटर” हैं। लेकिन ईरान ने कन्फर्म किया वे जिंदा और हेल्दी हैं।
जून 2025: 12-दिन की जंग – इज़राइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल बेस और कई IRGC कमांडर्स (जैसे हुसैन सलामी, अमीर हाजीज़ादेह) को टारगेट किया। क़ानी फिर बच गए, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें इंटरोगेट किया गया (इज़राइल की घुसपैठ के शक में)।
फरवरी-मार्च 2026: सबसे बड़ा हमला (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) – 28 फरवरी 2026 को
अमेरिका-इज़राइल ने संयुक्त हमला किया। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (86 वर्ष) उनका कम्पाउंड तबाह हुआ। उनके साथ डिफेंस मिनिस्टर अमीर नासिरजादेह, IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर, अली शमखानी, और कई अन्य टॉप लीडर्स मारे गए। खामेनेई के दामाद, बेटी, नवासा (कम उम्र का) भी शहीद हुए। ईरानी मीडिया ने कन्फर्म किया। लेकिन क़ानी फिर बच गए – ईरान ने कन्फर्म किया वे जिंदा हैं। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं वे मीटिंग में थे लेकिन सेकंड्स पहले निकल गए।
सोशल मीडिया पर लोग कहते हैं: “यह दुनिया का सबसे लकी आदमी है!” या “ट्रेटर है, मोसाद का एजेंट!” अफवाहें 2024 से चली आ रही हैं, जब नसरल्लाह की मौत के बाद क़ानी पर “इज़राइल का जासूस” होने का शक हुआ। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया IRGC ने उन्हें हाउस अरेस्ट में रख जांच की, लेकिन कोई ठोस प्रूफ नहीं।
खामेनेई की मौत में सुरक्षा चूक कहां हुई?
खामेनेई की सुरक्षा सबसे सख्त थी – उनका कम्पाउंड हाई-सिक्योरिटी जोन था। लेकिन हमला इतना सटीक था कि बॉडी रिकवर हुई और फोटो इज़राइल/अमेरिका को दिखाई गईं (नेतनयाहू और ट्रंप को दिखाई गईं, रिपोर्ट्स के मुताबिक)। ईरान में मीटिंग चल रही थी (वार्ता के दौर में, अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर टॉक्स का तीसरा राउंड बाकी था)। इज़राइल ने बिना सूचना हमला किया, जो इंटरनेशनल कानून (बातचीत के दौरान हमला न करना) की धज्जियां उड़ाता है।
इतनी सटीक जानकारी (कौन कहां है, फोटो जारी करना) कैसे मिली? इज़राइल की इंटेलिजेंस (मोसाद) बहुत स्ट्रॉन्ग है – इनफिल्ट्रेशन, सैटेलाइट, ह्यूमन इंटेल। लेकिन कुछ लोग कहते हैं अंदरूनी “मोल” था। क़ानी पर शक इसलिए क्योंकि वे बार-बार मौजूद थे लेकिन बच गए।हालांकि सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाज़ार गर्म है लेकिन ईरान की तरफ से ऐसा कोई संदेश कानी कि गिरफ्तारी या उनकी सज़ा के प्रति अभीतक नहीं आया है।
सऊदी अरब की भूमिका?
रिपोर्ट्स (Washington Post आदि) कहती हैं सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से कई प्राइवेट कॉल्स किए, हमला करने की सलाह दी। पब्लिकली सऊदी डिप्लोमेसी की बात करता था, लेकिन प्राइवेटली “अब स्ट्राइक करो, ईरान मजबूत हो जाएगा” कहा। इज़राइल ने भी लॉबिंग की। ट्रंप ने हमला किया, क्योंकि रीजनल अलायंस (इज़राइल-सऊदी) ने दबाव डाला। हमले के बाद ईरान ने अमेरिकी बेस तबाह किए, लेकिन सऊदी ने कहा वे डिफेंड करेंगे।
हालांकि ये संदेह है कोई ऑफिशियल प्रूफ नहीं कि क़ानी ट्रेटर हैं।
ईरान के लिए सबक: IRGC में घुसपैठ की जांच जरूरी। कई रिपोर्ट्स में ईरान ने “ट्रेटर्स” को एक्जीक्यूट किया। क़ानी पर शक से IRGC में डर फैला है।
ईरान की मजबूती और चुनौतियां
ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों से कमजोर है, लेकिन अकेले कई दुश्मनों (इज़राइल, अमेरिका, सऊदी) से लड़ रहा है। ईरान ने रिटेलिएट किया (अमेरिकी बेस पर हमले), लेकिन लंबे युद्ध में नुकसान होगा। यह जंग इज्जत की है, लेकिन भरपाई मुश्किल। ईरान को गहन मंथन करना होगा – इंटेलिजेंस में साफ-सफाई, प्रॉक्सी नेटवर्क मजबूत करना, और अंदरूनी विश्वासघात रोकना।
क़ानी की कहानी ईरान की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। अगर वे ट्रेटर नहीं, तो “लकी” हैं; अगर हैं, तो यह IRGC की सबसे बड़ी कमजोरी। समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, यह कॉन्स्पिरेसी थ्योरी ज्यादा लगती है, ठोस सबूतों के बिना। ईरान को एकजुट रहना होगा – दुश्मन बाहर से ज्यादा अंदर से खतरनाक हो सकते हैं।



