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RSS प्रचारक यशवंत शिंदे के खुलासे फिर वायरल: कोर्ट की खारिजगी ने उजागर की RSS की ‘आतंकी’ गतिविधियों की सच्चाई, केरल ब्लास्ट्स से जुड़ाव ने बढ़ाई चिंता

ज़की भारतीय

लखनऊ, 7 अक्टूबर । सोशल मीडिया पर एक बार फिर से पुराना लेकिन सनसनीखेज वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पूर्व RSS प्रचारक यशवंत शिंदे ने संगठन की कथित ‘आतंकी ट्रेनिंग’ और बम बनाने की साजिशों का पर्दाफाश किया था।

2022 में नांदेड़ कोर्ट में दाखिल उनके शपथ-पत्र ने RSS और VHP पर देशभर में बम ब्लास्ट कराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगस्त 2025 में उनकी याचिका खारिज करने के बाद यह सवाल और तेज हो गया है: क्या कोर्ट ने जानबूझकर RSS की ‘पोल खोलने’ से इनकार कर दिया? विशेषज्ञों का मानना है कि शिंदे के ‘इनसाइडर’ होने और खुद संगठन से जुड़े रहने के कारण उनके दावों की विश्वसनीयता बढ़ जाती है, जो RSS को ‘सेकुलर’ चेहरे के पीछे छिपे ‘आतंकवादी संगठन’ जैसी गतिविधियों का प्रमाण बनती है।
शिंदे, जो मुंबई के संध प्रचारक रह चुके थे, ने अपने वीडियो और एफिडेविट में 2003-2006 के बीच RSS-VHP द्वारा पुणे के सिंहगढ़ कैंप में बम बनाने की ट्रेनिंग, नांदेड़ ब्लास्ट (2006) को ‘फेल टेस्ट’ बताने और RSS लीडर इंद्रेश कुमार जैसे नामों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ये साजिशें मुस्लिमों को फंसाने और BJP को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए थीं। “RSS-VHP देश को बम से उड़ाना चाहते थे, और मोदी सरकार आने के बाद ये और सक्रिय हो गईं,” शिंदे ने कहा। विपक्षी नेता इसे ‘सफरॉन टेरर’ का सबूत मानते हैं, जबकि RSS ने इसे ‘झूठा प्रचार’ करार दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला – जिसमें शिंदे को 2006 नांदेड़ केस में गवाह बनाने की मांग 16 साल की देरी का हवाला देकर खारिज कर दी गई – ने कई सवाल खड़े कर दिए। आलोचकों का कहना है कि यह RSS की ‘संरक्षण’ की मिसाल है, क्योंकि CBI ने कभी इन आरोपों पर गंभीर कार्रवाई नहीं की।
यह वीडियो 2025 में RSS के 100 साल पूरे होने (#RSS100YearsExposed) के बहाने फिर वायरल हो रहा है, और X पर हजारों यूजर्स इसे शेयर कर रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ पुरानी स्टोरी नहीं; हालिया घटनाएं इसे और प्रासंगिक बनाती हैं। केरल में RSS से जुड़े सदस्यों की बम बनाने की कोशिशें इसका जीता-जागता प्रमाण हैं।
अप्रैल 2023 में कन्नूर जिले के एरंजोलिपअलम के पास RSS कार्यकर्ता विष्णु (20) ने घर के पास ही बम बनाते समय विस्फोट में दोनों हथेलियां गंवा दीं। यह घटना 30 दिनों में दूसरी थी, जब हिंदुत्व समर्थकों को बम बनाने के दौरान चोट लगी।

स्थानीय लोगों ने बताया था,विस्फोट से पहले उसी जगह धमाके जैसी आवाजें सुनाई दी थीं।
इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन RSS ने इसे ‘व्यक्तिगत दुर्घटना’ बताया।

यह अकेली घटना नहीं। मार्च 2024 में कन्नूर के पॉयिलूर में RSS नेता वडकायिल प्रमोद के घर से 770 किलो विस्फोटक जब्त किए गए, जो लोकसभा चुनावों से ठीक पहले की घटना थी। प्रमोद फरार हैं, और पुलिस ने दो केस दर्ज किए। ये घटनाएं शिंदे के दावों को मजबूत करती हैं, जहां वे RSS को ‘आतंकवादी संगठनों’ जैसा बताते हैं – ट्रेनिंग कैंप, फॉल्स फ्लैग ऑपरेशंस और दंगों को भड़काने की साजिशें।

केरल पुलिस ने कहा, “ऐसी गतिविधियां क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।” विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और CPI(M) ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की मांग की है, जबकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना स्वतंत्र जांच के RSS का ‘सेकुलर’ मुखौटा देश को विभाजित करता रहेगा।
यह मुद्दा देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर RSS जैसा संगठन बम बनाने जैसी ‘आतंकी’ गतिविधियों में लिप्त है, तो लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव खतरे में है। शिंदे जैसे पूर्व सदस्यों के खुलासे और केरल जैसी घटनाएं साबित करती हैं कि RSS ‘हिंदू राष्ट्र’ के नाम पर हिंसा फैला रहा है, जो अंततः देश को बर्बाद कर सकता है। सरकार को तत्काल CBI या NIA जांच का आदेश देना चाहिए, वरना यह ‘गलत हीरोज’ की जीत होगी। X पर #ExposeRSS और #SaffronTerror ट्रेंड कर रहे हैं – क्या आप भी आवाज उठाएंगे?

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