HomeArticleKGMU में OSD सैयद अख्तर अब्बास की पुनर्नियुक्ति: योग्यता पर आधारित फैसला...
KGMU में OSD सैयद अख्तर अब्बास की पुनर्नियुक्ति: योग्यता पर आधारित फैसला या सांप्रदायिक साजिश का शिकार?
ज़की भारतीय
लखनऊ, 18 जनवरी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में वाइस चांसलर (VC) के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) सैयद अख्तर अब्बास की सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति को लेकर कुछ स्थानीय चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर विवाद छिड़ गया है। कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा इसे हिंदू-मुस्लिम रंग देकर अब्बास को ‘जिहादी’ का नाम दिया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह नियुक्ति पूरी तरह से उनके अनुभव, बेहतर कार्यप्रदर्शन और यूनिवर्सिटी की आवश्यकताओं पर आधारित है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की री-एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी का भी उदाहरण है, जहां रिटायर्ड अधिकारियों को उनके योगदान के आधार पर दोबारा जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां अनुभवी लोगों को पुनर्नियुक्त किया गया है, लेकिन यहां इसे सांप्रदायिक रंग देकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
KGMU, जो उत्तर भारत का प्रमुख मेडिकल संस्थान है, में VC प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार चल रहे हैं। सैयद अख्तर अब्बास, जो एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी हैं, को रिटायरमेंट के बाद OSD के रूप में पुनर्नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में कोविड-19 महामारी के दौरान KGMU में ब्लैकलिस्टेड फर्मों से भुगतान या NABL लैब में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन ये आरोप आधारहीन साबित हो रहे हैं। अब्बास ने अपने लंबे करियर में हमेशा पारदर्शिता और समर्पण दिखाया है। उनके समर्थकों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति उत्तर प्रदेश सिविल सर्विसेज रेगुलेशंस (CSR) के चैप्टर XXI के तहत पूरी तरह वैध है, जहां पेंशनभोगियों को पब्लिक इंटरेस्ट में री-एम्प्लॉय किया जा सकता है। पेंशन और नए वेतन की समायोजन प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप है, और कोई हेराफेरी का प्रमाण नहीं मिला है।
हालांकि, कुछ स्थानीय चैनल जैसे सुदर्शन न्यूज UP और X पर सक्रिय कुछ अकाउंट्स द्वारा इस नियुक्ति को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है। एक हालिया X पोस्ट में सुदर्शन न्यूज UP ने दावा किया कि अब्बास को नियम तोड़कर परमानेंट किया गया, पेंशन में हेराफेरी हुई, और विधानसभा से विधान परिषद तक यह मुद्दा गूंजा। पोस्ट में उन्हें ‘पावर का समानांतर केंद्र’ बताया गया, जो स्पष्ट रूप से सांप्रदायिक पूर्वाग्रह से प्रेरित लगता है। इस पोस्ट में KGMU में बड़े घोटाले की परतें खुलने की बात कही गई, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए। वास्तव में, यह प्रचार एक बड़ी साजिश का हिस्सा लगता है, जहां कुछ कट्टरपंथी हिंदू तत्व अपने निजी स्वार्थों के लिए अब्बास को बदनाम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह साजिश VC प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद को भी हटाने की मांग से जुड़ी है, ताकि कोई और व्यक्ति VC बन सके। VC, जो एक महिला हैं, पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे अब्बास को हटाएं, अन्यथा खुद को हटाने की मांग उठेगी। यह स्पष्ट है कि यह अंदरूनी राजनीति है, जहां कुछ लोग पद हथियाने के लिए धर्म की राजनीति कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति कोई नई बात नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कई विभागों में अनुभवी रिटायर्ड अधिकारियों को दोबारा जिम्मेदारियां सौंपी हैं, ताकि प्रशासनिक दक्षता बनी रहे। उदाहरण के लिए, 2023 में योगी जी ने सुझाव दिया था कि नए शिक्षकों की नियुक्ति होने तक रिटायर्ड टीचर्स को फिक्स्ड ऑनरैरियम पर रखा जाए। यह नीति शिक्षा विभाग में लागू हुई, जहां सैकड़ों रिटायर्ड शिक्षकों को पुनर्नियुक्त किया गया, जिससे छात्रों को लाभ मिला। इसी तरह, यूपी पूर्व सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से एक्स-सर्विसमेन को री-एम्प्लॉयमेंट दिया गया। 2025 में यह संख्या 30,000 तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष के 22,000 से अधिक है। योगी जी ने इसे सराहा और कहा कि यह सैनिकों के अनुभव का सदुपयोग है।
लखनऊ में ही, कई मेडिकल संस्थानों में रिटायर्ड डॉक्टर्स को 70 वर्ष की उम्र तक एक्सटेंशन दिया जाता है। KGMU में भी 2023-2025 के दौरान रिटायर्ड फैकल्टी को कॉन्ट्रैक्टुअल बेसिस पर रखा गया, ताकि स्टाफ की कमी पूरी हो। स्वास्थ्य विभाग में योगी सरकार ने अंडर-परफॉर्मर्स को 50 वर्ष की उम्र में रिटायर करने के आदेश दिए, लेकिन अच्छे प्रदर्शन वालों को री-एम्प्लॉय किया। पुलिस विभाग में भी रिटायर्ड IPS अधिकारियों को स्पेशल टास्क्स पर रखा गया, जैसे COVID प्रबंधन में। विधानसभा और विधान परिषद में ऐसे कई मामले चर्चा में आए, लेकिन वे सभी पब्लिक इंटरेस्ट में थे। एक अन्य उदाहरण है, जहां रिटायर्ड IAS अधिकारियों को बोर्ड चेयरमैन या एडवाइजर बनाया गया। योगी सरकार में लगभग 60 सीनियर अधिकारियों को री-एम्प्लॉयमेंट दिया गया, जो प्रशासन को मजबूत करने के लिए था। इन उदाहरणों से साफ है कि अब्बास की नियुक्ति भी इसी नीति का हिस्सा है, जो उनके बेहतर कामकाज पर आधारित है।
फिर सवाल उठता है कि अब्बास के मामले में ही हिंदू-मुस्लिम क्यों? यह मुट्ठी भर कट्टरपंथी हिंदू तत्वों की करतूत है, जो अपने निजी लाभ के लिए रिश्वतखोरी और पद हथियाने की कोशिश कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि अब्बास हटें, ताकि उनका कोई चहेता व्यक्ति OSD बने। इस प्रचार से न केवल अब्बास की छवि खराब की जा रही है, बल्कि KGMU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा पर भी आंच आ रही है। अब्बास, जो एक शरीफ भारतीय मुस्लिम हैं, ने अपने 30-40 वर्षों के करियर में कभी कोई कलंक नहीं लगने दिया। उन्होंने हमेशा प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं, कोविड काल में योगदान दिया, और NABL लैब जैसे विभागों में सुधार किए। आरोप लगाने वाले चैनल और X अकाउंट्स, जो तथाकथित पत्रकारों के माध्यम से काम कर रहे हैं, आधारहीन खबरें चला रहे हैं। यह देश में मजहबी राजनीति फैलाने का प्रयास है, जो देशद्रोह जैसा है।
ऐसी स्थिति में, सच को सच और गलत को गलत मानने वालों को इस प्रकरण में सच का साथ देना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसकी जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। गलत खबरें चलाने वाले चैनलों और X यूजर्स से सबूत मांगे जाएं – किस आधार पर उन्होंने अब्बास को आरोपित किया? यदि कोई आधार नहीं, तो उन पर प्रतिबंध लगाया जाए। भ्रामक खबरें फैलाने वाले ये लोग देश का माहौल खराब कर रहे हैं, और इन्हें दंडित किया जाना जरूरी है। VC प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद पर दबाव बनाने की यह साजिश असफल होनी चाहिए, क्योंकि वे KGMU को आगे ले जा रही हैं।
अंत में, यह स्पष्ट है कि अब्बास की पुनर्नियुक्ति योग्यता, अनुभव और अच्छे कार्यकाल पर आधारित है। इसमें हिंदू-मुस्लिम का कोई लेना-देना नहीं। उत्तर प्रदेश सरकार की री-एम्प्लॉयमेंट नीति सभी के लिए समान है, और इसे सांप्रदायिक रंग देकर बदनाम करना अनुचित है। ऐसे देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही समाज में सद्भाव बनेगा। KGMU जैसे संस्थान को राजनीति से दूर रखना चाहिए, ताकि मरीजों और छात्रों का हित सुरक्षित रहे।
Post Views: 126