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गाजियाबाद में पुलिसकर्मी की शहादत: हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई नोएडा पुलिस पर जानलेवा हमला

लखनऊ,25 मई । 26 मई 2025 की रात उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में एक सनसनीखेज और दुखद घटना घटी, जिसमें नोएडा पुलिस के कॉन्स्टेबल सौरभ कुमार देशवाल की गोली लगने से मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब नोएडा पुलिस की एक टीम कुख्यात हिस्ट्रीशीटर कादिर उर्फ मंटा को गिरफ्तार करने गई थी। हमले में 2-3 अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह घटना उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और पुलिसकर्मियों के सामने आने वाले जोखिमों को उजागर करती है

घटना की शुरुआत 21 मई 2025 को नोएडा के फेज-3 थाने में दर्ज एक शिकायत से हुई, जिसमें विकास नामक एक व्यक्ति ने बताया कि 2 मई 2025 की रात उनकी कार से म्यूजिक सिस्टम चोरी हो गया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में कादिर उर्फ मंटा का नाम सामने आया, जो गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव का निवासी था। कादिर एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर था, जिसके खिलाफ लूट, गैंगस्टर एक्ट, और चोरी के 16 से अधिक मामले दर्ज थे। उसकी कोठी, जो कथित तौर पर लूट की कमाई से बनी थी, नाहल गांव में तीन मंजिला इमारत के रूप में थी, जिसके गेट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे।

25 मई 2025 की देर रात, नोएडा फेज-3 थाने की एक पुलिस टीम को सूचना मिली कि कादिर नाहल गांव में अपने घर पर छिपा हुआ है। इस सूचना के आधार पर, उप-निरीक्षक सचिन कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम, जिसमें कॉन्स्टेबल सौरभ कुमार देशवाल और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे, रात करीब 12:30 बजे नाहल गांव पहुंची। इस ऑपरेशन में एक मुखबिर भी शामिल था, जिसने कादिर की पहचान की पुष्टि की।

पुलिस टीम ने रात के अंधेरे में नाहल गांव में कादिर के घर पर छापेमारी की और उसे सफलतापूर्वक हिरासत में ले लिया। कादिर को पकड़ने के बाद, पुलिस उसे लेकर गांव से बाहर निकल रही थी। लेकिन जैसे ही टीम पंचायत भवन के पास पहुंची, कादिर ने चिल्लाना शुरू कर दिया, “मुझे पुलिस ने पकड़ लिया है, इन्हें पकड़ो और मारो!” उसकी आवाज सुनते ही गांव के कुछ लोग और कादिर के 8-10 साथी, जो पहले से खेतों में घात लगाए बैठे थे, ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया।

हमलावरों ने पहले पथराव शुरू किया, जिससे पुलिसकर्मी असमंजस में पड़ गए। इसके बाद, भीड़ ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में एक गोली कॉन्स्टेबल सौरभ कुमार के सिर में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में फायरिंग की, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। हमले के दौरान 2-3 अन्य पुलिसकर्मी भी पथराव में घायल हो गए। सौरभ को तत्काल गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही गाजियाबाद और नोएडा पुलिस ने भारी बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। कादिर, जो हमले के दौरान अपने साथियों के साथ फरार होने की कोशिश कर रहा था, को कुछ ही घंटों में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने कादिर और उसके भाई सहित अन्य अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय नवीन संहिता (BNS) की धाराओं 191(2), 191(3), 190, 131, 125, 121(2), 132, 109(1), 103(1), 61(2), 50, और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया।

कादिर के तीन मंजिला मकान के बाहर पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र बल) की तैनाती कर दी गई है, और उसके घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच शुरू की गई है ताकि अन्य हमलावरों की पहचान हो सके। डीसीपी (ग्रामीण) सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि यह एक सुनियोजित हमला था, और पुलिस सभी दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए सघन अभियान चला रही है।

कॉन्स्टेबल सौरभ कुमार देशवाल: एक जांबाज सिपाही

शहीद सौरभ कुमार देशवाल उत्तर प्रदेश के शामली जिले के निवासी थे। वह नोएडा पुलिस में एक समर्पित और साहसी कॉन्स्टेबल के रूप में जाने जाते थे। उनकी शहादत ने पुलिस विभाग और स्थानीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ा दी है। सौरभ के परिवार में उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं, जिनके लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। पुलिस विभाग ने उनके बलिदान को सलाम करते हुए उनके परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

इस घटना ने गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। कादिर जैसे हिस्ट्रीशीटर का प्रभाव नाहल गांव और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से रहा है, जिसने स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल बनाया हुआ था। X पर कई पोस्ट्स में इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।

पुलिस आयुक्त ने इस घटना के बाद बीट पुलिसिंग को और मजबूत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि बीट पुलिस अधिकारी अपने क्षेत्र की हर गली-नुक्कड़ का पूरा ज्ञान रखें और स्थानीय जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करें ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, साइबर अपराधों और सामुदायिक सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की योजना भी बनाई गई है।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

यह घटना गाजियाबाद में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिस्ट्रीशीटर जैसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है, लेकिन साथ ही पुलिस को अपनी रणनीति में सुधार करना होगा ताकि ऐसी घटनाओं में जवानों की जान न जाए। कादिर के मामले में, उसके सीसीटीवी कैमरों और तीन मंजिला कोठी से यह स्पष्ट है कि वह एक संगठित अपराधी था, जिसके पास स्थानीय समर्थन भी था।
कॉन्स्टेबल सौरभ कुमार देशवाल की शहादत एक दुखद घटना है, जो पुलिस बल के सामने आने वाली चुनौतियों और जोखिमों को उजागर करती है। यह घटना न केवल गाजियाबाद, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है। कादिर जैसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बेहतर पुलिस प्रशिक्षण, और सामुदायिक सहयोग के बिना ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा। सौरभ की शहादत को सलाम करते हुए, यह जरूरी है कि पुलिस और प्रशासन इस घटना से सबक ले और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

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