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लखनऊ , 23 मई । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है, क्योंकि ईरान ने इजरायल और अमेरिका को एक साथ सख्त चेतावनी दी है। ईरानी सशस्त्र बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि यदि इजरायल और अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी “आक्रामक नीतियाँ” जारी रखीं, तो ईरान इसका करारा जवाब देने के लिए तैयार है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब गाजा और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा दिया है, और अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।ईरानी सेना के जनरल हुसैन सलामी ने एक सैन्य परेड के दौरान यह बयान दिया, जिसमें ईरान ने अपनी नवीनतम मिसाइल तकनीक और ड्रोन सिस्टम का प्रदर्शन किया। परेड में दिखाए गए सैन्य वाहनों और हथियारों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि ईरान किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। जनरल सलामी ने कहा, “इजरायल और अमेरिका को यह समझना होगा कि उनकी हरकतें बिना परिणाम के नहीं रहेंगी। हमारी सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है, और हम अपने दुश्मनों को सबक सिखाने में पीछे नहीं हटेंगे।”यह चेतावनी क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कई कारणों से चिंता का विषय बन गई है। सबसे पहले, गाजा में इजरायल और हमास के बीच हालिया संघर्ष ने पहले ही मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है। इजरायल ने पिछले कुछ हफ्तों में गाजा में कई हवाई हमले किए हैं, जिनमें दर्जनों नागरिकों की मौत की खबरें आई हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिसे तेहरान ने “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये प्रतिबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता में उसकी भूमिका को रोकने के लिए लगाए गए हैं।ईरान ने इन दोनों घटनाओं को अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है। तेहरान का कहना है कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयाँ और अमेरिका के प्रतिबंध दोनों ही अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम किसी भी देश को हमारे खिलाफ आक्रामकता की इजाजत नहीं देंगे। इजरायल और अमेरिका को अपने कदमों के परिणाम भुगतने होंगे।”इस चेतावनी के बाद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है कि यह स्थिति एक बड़े संघर्ष में बदल सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा, “मध्य पूर्व पहले से ही कई संकटों से जूझ रहा है। हमें एक और युद्ध की जरूरत नहीं है। सभी पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।”दूसरी ओर, इजरायल और अमेरिका ने इस चेतावनी को गंभीरता से लिया है। इजरायली रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वे किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं, और उनकी सेना हाई अलर्ट पर है। अमेरिका ने भी अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर जवाबी रणनीति तैयार करने की बात कही है।यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों पर एक और धक्का है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तनाव को कम करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसमें न केवल ईरान, इजरायल और अमेरिका, बल्कि अन्य क्षेत्रीय शक्तियाँ भी शामिल हो सकती हैं।इस बीच, ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियाँ तेज कर दी हैं। सैन्य परेड और बयानबाजी से यह साफ है कि तेहरान अपनी स्थिति को मजबूत करने और अपने दुश्मनों को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश कर रहा है। लेकिन क्या यह चेतावनी एक बड़े युद्ध की शुरुआत होगी, या केवल कूटनीतिक दबाव का हिस्सा है, यह आने वाला समय ही बताएगा।



