लखनऊ, 22 मई। बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी इंडिया गठबंधन सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को चुनौती देने के लिए अपनी तैयारियों को और मजबूत कर रहा है। गठबंधन की पार्टियों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस, के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करने पर जोर है, साथ ही जमीनी स्तर पर एकजुटता सुनिश्चित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।आरजेडी सांसद मनोज झा ने एक विशेष बातचीत में गठबंधन की ताकत पर जोर देते हुए कहा, “यह एक मजबूत गठबंधन है। हमारे दलों की सोच भले ही अलग हो, लेकिन मूल रूप से हमारा लक्ष्य एक है। कुछ राज्यों में हमने अलग-अलग चुनाव लड़े हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह गठबंधन एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरा है। हम बिहार की जनता को भरोसा दिलाते हैं कि इंडिया गठबंधन शानदार नतीजे देगा।” सीट बंटवारे के सवाल पर झा ने शायराना अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “कई बातें जो जुबान नहीं बोल पाती, वो आंखें बयां कर देती हैं।” इससे संकेत मिलता है कि सीटों का बंटवारा लगभग तय हो चुका है और जल्द ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला आरजेडी 243 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर चुनाव लड़ेगा, जबकि कांग्रेस को 2020 के चुनाव में लड़ी गई 70 सीटों की तुलना में इस बार कम सीटें मिल सकती हैं। आरजेडी का मानना है कि कांग्रेस इस बार छोटी पार्टियों को ज्यादा मौका देगी। आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई(एमएल) सहित छह दलों का यह गठबंधन नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए को टक्कर देने के लिए एकजुट रणनीति पर काम कर रहा है।कांग्रेस बिहार में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है, ताकि विधानसभा चुनाव के बाद अगले लोकसभा चुनाव में भी इसका फायदा मिले। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “अगले पांच महीनों में कांग्रेस बिहार में अपना जनाधार बढ़ाने पर ध्यान देगी। राहुल गांधी कई बार बिहार का दौरा करेंगे।” पार्टी आरजेडी के साथ गठबंधन को मजबूत कर अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश में है।इंडिया गठबंधन ने जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। 28 मई को एक संयुक्त संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें गठबंधन की सभी छह पार्टियां हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम में नीतीश सरकार की खामियों, खासकर शासन और विवादास्पद वक्फ कानून संशोधन जैसे मुद्दों को उजागर किया जाएगा। गठबंधन जाति जनगणना जैसे मुद्दों को भी जोर-शोर से उठा रहा है, जो बिहार के मतदाताओं के बीच गूंज रहा है।
हालांकि, गठबंधन के भीतर पहले कुछ मामलों पर तनाव देखने को मिले थे,लेकिन हाल की बैठकों में ये मतभेद नज़र नहीं आ रहे हैं। आरजेडी ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है। मनोज झा ने कहा, “नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम नहीं है। 2020 में तेजस्वी ने हमें नेतृत्व दिया और 2025 में भी वही जनता की पसंद हैं।”दूसरी ओर, नीतीश कुमार की जेडी(यू) और बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए अपनी रणनीति पर भरोसा जता रहा है। जेडी(यू) सांसद संजय कुमार झा ने कहा, “इंडिया गठबंधन की कोई ताकत नहीं बची। नीतीश कुमार के अलग होने के बाद यह गठबंधन खत्म हो गया।” एनडीए अपनी जातिगत समीकरणों और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा कर रहा है, लेकिन आरजेडी की आक्रामक रणनीति और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM की 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना विपक्षी वोटों को बांट सकती है।चुनाव नजदीक आने के साथ ही दोनों गठबंधन अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इंडिया गठबंधन का जमीनी स्तर पर समन्वय, नीतीश सरकार की कमियों पर हमला और तेजस्वी के नेतृत्व पर भरोसा बिहार में एक रोमांचक सियासी जंग का मंच तैयार कर रहा है।



