लखनऊ, 9 अगस्त। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को “टैरिफ का महाराजा” कहने और भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी के जवाब में भारत ने आज एक दमदार कूटनीतिक रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “भारत अपनी व्यापार नीतियाँ राष्ट्रीय हितों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के आधार पर तय करता है। रूस से तेल खरीद हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है, और इसे हम जारी रखेंगे।” इस बयान को लखनऊ में व्यापक प्रशंसा मिली, क्योंकि इसे भारत की आर्थिक स्वायत्तता और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।लखनऊ में सुबह 11:30 बजे, लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग ने एक सेमिनार आयोजित किया, जिसमें प्रोफेसर संजय मिश्रा ने कहा, “भारत का यह रुख अमेरिकी दबाव को खारिज करने का साहसी कदम है। यह हमारी वैश्विक ताकत को दर्शाता है।” लखनऊ के चिकनकारी और टेक्सटाइल व्यापारियों ने दोपहर 1:30 बजे लखनऊ चैंबर ऑफ कॉमर्स की एक बैठक में चिंता जताई कि अमेरिकी टैरिफ से निर्यात प्रभावित हो सकता है, लेकिन उन्होंने सरकार की जवाबी टैरिफ की योजना का स्वागत किया। चैंबर के अध्यक्ष रमेश अग्रवाल ने कहा, “हम सरकार के साथ हैं। भारत-अमेरिका व्यापार (90 बिलियन डॉलर वार्षिक) को संतुलित रखने के लिए कूटनीति जरूरी है।”डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी आज एक चर्चा में भारत की रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की कूटनीति की सराहना की। स्थानीय निवासी अमित सिंह ने कहा, “यह भारत का गर्व का क्षण है। हमारी सरकार ने दिखा दिया कि हम किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे।” यह खबर लखनऊ में राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाने वाली मानी जा रही है।



