ज़की भारतीय
लखनऊ, 19 जून। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे सैन्य तनाव ने मध्य पूर्व को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। इस संघर्ष की आंच अब भारत के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच चुकी है, जहां कट्टरपंथी संगठन, फर्जी पहचान (फेक आईडी), और भ्रामक सामग्री के जरिए नफरत और वैमनस्य फैलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। हाल के दिनों में, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में ऐसी तस्वीरें और दावे सामने आए हैं, जो न केवल भ्रामक हैं, बल्कि समाज में वैमनस्य और धार्मिक उन्माद भड़काने का काम कर रहे हैं। इनमें से एक तस्वीर, जिसमें दावा किया गया कि ईरान ने एक कथित जासूस को मिसाइल पर बांधकर इजरायल भेजा, विशेष रूप से चर्चा में है। यह तस्वीर और इसके पीछे की साजिश न केवल ईरान को बदनाम करने की कोशिश है, बल्कि भारत में सामाजिक सौहार्द को भी खतरे में डाल रही है।
सोशल मीडिया पर नफरत का ताना-बाना
ईरान और इजरायल के बीच 13 जून 2025 से शुरू हुए सैन्य टकराव, जिसे ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ और ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ के नाम से जाना जा रहा है, ने वैश्विक स्तर पर तनाव पैदा किया है। इस दौरान, इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में तेल अवीव और अन्य इजरायली शहरों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस युद्ध की खबरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही फर्जी खबरें और भ्रामक सामग्री भी तेजी से फैल रही हैं।
भारत में, कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू संगठनों के समर्थकों ने इस मुद्दे को धार्मिक रंग देना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर ‘कतरबंदी’ (धार्मिक आधार पर पक्षपात) का माहौल देखा जा रहा है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक पोस्ट्स और कमेंट्स कर रहे हैं। इस बीच, कुछ फर्जी पहचान (फेक आईडी) के जरिए ऐसी सामग्री फैलाई जा रही है, जो न केवल गलत है, बल्कि समाज में नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे सकती है।
फर्जी तस्वीर और ईरान को बदनाम करने की साजिश

हाल ही में, एक सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसी तस्वीर साझा की गई, जिसमें दावा किया गया कि ईरान ने एक कथित जासूस, जो कथित रूप से इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर रहा था, को मिसाइल पर बांधकर इजरायल वापस भेजा। दरअसल इस तस्वीर के माध्यम से ईरान की क्रूरता दिखाने का प्रयास किया जा रहा है । देशद्रोही को मिसाइल पर बांधकर भेजा गया। यह तस्वीर इतनी भयावह और उत्तेजक थी कि इसे देखकर कई लोग भावनाओं में बह गए और ईरान के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने लगे।
हालांकि, जब इस तस्वीर की सत्यता की जांच की गई, तो यह पूरी तरह से फर्जी निकली। यह तस्वीर न तो हाल की थी, न ही इसका ईरान-इजरायल संघर्ष से कोई संबंध था। ऐसी तस्वीरें अक्सर पुराने संदर्भों से ली जाती हैं या डिजिटल रूप से संपादित की जाती हैं ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके। इस मामले में, तस्वीर को साझा करने वाली आईडी का नाम ‘मंजूर’ (MANJUR) था, जो मुस्लिम समुदाय में MANZOOR से लिखा जाता है,न कि मंजूर। लेकिन जब इस आईडी की प्रोफाइल को खंगाला गया, तो कई संदिग्ध बातें सामने आईं।
फर्जी आईडी की हकीकत

‘मंजूर’ नाम की इस फर्जी आईडी की जांच करने पर पता चला कि यह भारत में बनाई गई थी और इसके पोस्ट्स में नफरत भरी सामग्री थी, बल्कि कुछ पोस्ट्स में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे भी शामिल थे। इसके अलावा, इस प्रोफाइल में लखनऊ के लुलु मॉल की तस्वीर और कुछ अन्य स्थानीय संदर्भों का जिक्र था, जो यह दर्शाता है कि इसे भारत में ही संचालित किया जा रहा है। एक पत्रकार, जिन्होंने इस आईडी की पड़ताल की, ने बताया कि इस प्रोफाइल के पोस्ट्स में वर्तनी की गलतियां (जैसे ‘मंज़ूर’ को ‘मंजूर’ लिखना) और स्थानीय भाषा का इस्तेमाल था, जो गैर-पेशेवर और जानबूझकर भ्रामक लग रहा था।
इस तरह की फर्जी आईडी का इस्तेमाल करके नफरत फैलाने की कोशिश है। भारत में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर धार्मिक या राजनीतिक तनाव को बढ़ावा दिया गया। इस मामले में, यह स्पष्ट है कि इस फर्जी आईडी का मकसद ईरान को क्रूर और अमानवीय दिखाकर लोगों में उसके खिलाफ गुस्सा भड़काना था। साथ ही, यह भी संभव है कि इस तरह की सामग्री के जरिए भारत में शिया-सुन्नी या हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही हो।
पाकिस्तान का कनेक्शन?

फर्जी आईडी की प्रोफाइल में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारों का जिक्र चौंकाने वाला है। यह सवाल उठाता है कि क्या यह आईडी किसी विदेशी ताकत, खासकर पाकिस्तान से प्रेरित होकर संचालित की जा रही है। भारत में रहकर पाकिस्तान की हिमायत करने वाले व्यक्ति या समूह को देशद्रोह के दायरे में लाया जा सकता है। यह भी संभव है कि इस तरह की आईडी का इस्तेमाल भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए किया जा रहा हो। गृह मंत्रालय को इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है, जैसा कि एक सोशल मीडिया पोस्ट में भी सुझाव दिया गया है।
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी की जरूरत
सोशल मीडिया आज सूचना का सबसे तेज माध्यम है, लेकिन यह भ्रामक जानकारी और नफरत फैलाने का हथियार भी बन चुका है। ईरान-इजरायल तनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना पुष्टि किए पोस्ट्स साझा करना खतरनाक हो सकता है। एक पत्रकार ने इस फर्जी तस्वीर को साझा करने वाले व्यक्ति से बातचीत की और उन्हें तस्वीर की सत्यता जांचने की सलाह दी। जवाब में, उस व्यक्ति ने आक्रामक रवैया अपनाया, जो दर्शाता है कि इस तरह की सामग्री फैलाने वाले लोग अक्सर तथ्यों से ज्यादा भावनाओं को भड़काने में विश्वास रखते हैं।
भारत सरकार ने भी इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में, झारखंड एटीएस ने खुलासा किया था कि कुछ चरमपंथी संगठन सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स को सलाह दी है कि वे संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदारी से सामग्री साझा करें।
ईरान-इजरायल तनाव और भारत की स्थिति
भारत ने ईरान-इजरायल तनाव के बीच तटस्थ रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दी है और ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए कदम उठाए हैं। भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उस बयान से भी खुद को अलग कर लिया, जिसमें इजरायली हमलों की निंदा की गई थी। यह दर्शाता है कि भारत इस संघर्ष में किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं कर रहा है।



