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युद्ध के दौरान ईरान में फंसे 1000 भारतीयों को कैसे बुलाया जाएगा देश

लखनऊ, 17 जून । इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध ने पश्चिम एशिया को अस्थिरता के भंवर में धकेल दिया है। इस संकट के बीच ईरान में फंसे करीब 1000 भारतीय नागरिकों, जिनमें लखनऊ के 34 लोगों का एक समूह भी शामिल है, की सुरक्षा और स्वदेश वापसी भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। स्थानीय सूत्रों और भारतीय दूतावास के हवाले से खबरें आ रही हैं कि मिसाइल हमलों और हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण ये नागरिक भय और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। कई लोगों के पास पैसे खत्म हो चुके हैं, और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस स्थिति में भारत सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए निकासी की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों और प्रभावित लोगों का कहना है कि इस मामले में और व्यापक व त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।

ग्राउंड पर हालात: मिसाइलों की गड़गड़ाहट, बंद हवाई मार्ग

ईरान में मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं। इजरायल की ओर से तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों पर लगातार हवाई हमले हो रहे हैं, जबकि ईरान भी तेल अवीव जैसे इजरायली शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है। एक भारतीय छात्र, इम्तिसाल मोहिदीन, ने बताया, “रात को मिसाइलों के धमाकों की आवाज़ से नींद नहीं आती। हम बेसमेंट में छिपे रहते हैं, लेकिन डर हर पल बना रहता है।” लखनऊ के एक 34 सदस्यीय समूह, जिसमें ज्यादातर धार्मिक यात्री और छात्र शामिल हैं, ने बताया कि उनके पास भोजन और दवाइयों की कमी हो गई है। एक यात्री ने कहा, “हवाई अड्डे बंद हैं, फ्लाइट्स रद्द हैं, और हमारे पास पैसे भी खत्म हो रहे हैं। हम सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

“भारत सरकार का रुख: कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन

भारत सरकार ने इस संकट को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय के तहत दिल्ली में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया है। तेहरान में भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर ‪(+98 9128109115‬, ‪+98 9128109109‬, व्हाट्सएप: +98 901044557, ‪+98 9015993320‬, ‪+91 8086871709‬) और ईमेल (cons.tehran@mea.gov.in) जारी किए हैं। दूतावास ने एक गूगल फॉर्म भी साझा किया है, जिसमें फंसे हुए नागरिकों से उनकी जानकारी दर्ज करने को कहा गया है।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “हम ईरान में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। दूतावास लगातार उनकी स्थिति पर नज़र रखे हुए है और कुछ को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।”
ईरान ने भारत के अनुरोध पर जवाब देते हुए कहा है कि भले ही हवाई क्षेत्र बंद है, लेकिन जमीनी रास्ते (अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान, और अफगानिस्तान की सीमाएं) खुले हैं, जिनका उपयोग निकासी के लिए किया जा सकता है।

मौलाना सैफ अब्बास नकवी और अम्बर फाउंडेशन के अध्यक्ष की मांग

विदेश नीति विशेषज्ञों और प्रभावित नागरिकों का मानना है कि भारत सरकार को इस संकट में और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मौलाना सैफ अब्बास नकवी, अम्बर फाउंडेशन के अध्यक्ष, ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि ईरान और इराक में फंसे धार्मिक यात्रियों को एयरलिफ्ट किया जाए, जैसा कि पहले यूक्रेन जैसे संकटों में किया गया था। उन्होंने कहा, “कई यात्रियों की दवाइयां खत्म हो चुकी हैं, और उनकी सेहत बिगड़ रही है। सरकार को तुरंत हवाई मार्ग खुलवाने के लिए ईरान और इजरायल से बात करनी चाहिए।”कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार पर दबाव बनाया है, खासकर 1500 से अधिक भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर। पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने कहा, “महज़ परामर्श जारी करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को तत्काल निकासी की ठोस योजना बनानी होगी।” जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने भी अपने क्षेत्र के छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।भारत सरकार को क्या करना चाहिए?इस संकट में भारत सरकार को न केवल कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता दिखानी होगी, बल्कि मानवीय आधार पर भी त्वरित कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि सरकार को इजरायल और ईरान, दोनों के साथ अपने मजबूत संबंधों का उपयोग करके युद्धविराम या कम से कम अस्थायी हवाई गलियारा खुलवाने की बात करनी चाहिए। इससे हवाई मार्ग से निकासी संभव हो सकेगी।

जमीनी निकासी की योजना: ईरान द्वारा जमीनी रास्तों को खोलने की अनुमति का लाभ उठाते हुए, भारत को पड़ोसी देशों (जैसे आर्मेनिया, अजरबैजान) के साथ समन्वय कर तत्काल बसों और अन्य परिवहन साधनों की व्यवस्था करनी चाहिए।

आर्थिक और चिकित्सा सहायता

जिन नागरिकों के पास पैसे खत्म हो गए हैं, उनके लिए दूतावास के माध्यम से भोजन, दवाइयां, और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि हवाई क्षेत्र खुलता है, तो सरकार को विशेष उड़ानों (जैसे ऑपरेशन गंगा या वंदे भारत मिशन) की तर्ज पर तत्काल निकासी शुरू करनी चाहिए।सूचना और समन्वय: दूतावास को सोशल मीडिया और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नियमित अपडेट साझा करने चाहिए, ताकि फंसे हुए नागरिकों और उनके परिजनों में भरोसा बना रहे।

स्वदेश वापसी की उम्मीद

लखनऊ के 34 लोगों के समूह सहित हजारों भारतीय इस उम्मीद में हैं कि भारत सरकार उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी। एक प्रभावित यात्री ने कहा, “हमें भरोसा है कि हमारी सरकार हमें इस संकट से निकालेगी। बस जल्दी हो, क्योंकि हालात हर पल बिगड़ रहे हैं।” भारत सरकार ने पहले भी यूक्रेन, सूडान, और अन्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, और इस बार भी वह इस चुनौती से पार पाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।इस संकट में भारत का कूटनीतिक कौशल और मानवीय दृष्टिकोण न केवल अपने नागरिकों की जान बचाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी छवि को और मजबूत करेगा। सरकार ने पहले ही निकासी की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और उम्मीद है कि जल्द ही सभी भारतीय सुरक्षित अपने वतन लौट आएंगे।
हालांकि मेरे पोर्टल ने अभी पूर्व में लिखी एक खबर में संपर्क सूत्र दिए थे ,लेकिन पुनः दे रहे हैं।
संपर्क सूत्र:हेल्पलाइन नंबर: +98 9128109115, +98 9128109109व्हाट्सएप: +98 901044557, +98 9015993320, +91 8086871709ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in

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