लखनऊ, 23 मई। उत्तर प्रदेश के बहराइच, श्रावस्ती, महाराजगंज, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, और सिद्धार्थनगर जिलों में मस्जिदों, मजारों, और कब्रिस्तानों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई से मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल गया है। समुदाय का आरोप है कि उनके धार्मिक स्थलों को बिना ठोस कानूनी आधार के निशाना बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।ज्ञापन में मुस्लिम समुदाय ने कहा कि उनके धार्मिक स्थल, जो दशकों से मौजूद हैं, ज्यादातर वैध हैं और इन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई धार्मिक स्थल अवैध पाया जाता है, तो समुदाय खुद उसे हटाने को तैयार है, क्योंकि इस्लाम में अवैध रूप से धार्मिक स्थल बनाना जायज नहीं है। उन्होंने पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) के समय का उदाहरण दिया, जब मस्जिद-ए-ज़रार को, जो गलत इरादे से बनाई गई थी, स्वयं रसूल (स.अ.व.) ने गिरा दिया था। समुदाय का कहना है कि धार्मिक स्थलों को लेकर किसी भी कार्रवाई से पहले कोर्ट की उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।मुस्लिम प्रतिनिधियों ने यह भी चिंता जताई कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाइयों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है और समुदाय के बीच डर का माहौल बन रहा है। उन्होंने मांग की कि उनके वैध धार्मिक स्थलों को संरक्षण दिया जाए और किसी भी कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए। बहराइच के एसपी ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले की जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि किसी भी कार्रवाई में कानून का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।यह घटना धार्मिक स्थलों की वैधानिक स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। मुस्लिम समुदाय को उम्मीद है कि प्रशासन और कोर्ट इस मामले में निष्पक्षता बरतेंगे और उनके हितों की रक्षा करेंगे।



