
लखनऊ, 19 जून। तंजीम-ए- पैग़ाम -ए-ग़दीर की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जश्न-ए-ईद-ए-ग़दीर वा “मोबाहेला-के-उनवान” शीर्षक के अंतर्गत ऑल इंडिया महफिल-ए-मकासदे का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य महफिल 24 जिलहिज्जा, 21 जून 2025, दिन शनिवार को पसांय : 9 बजे से मालकाकेश्वर मस्जिद, कश्मीरी मोहल्ला रोड, लखनऊ में मुनअक़्क़िद होगी।
महफिल का आग़ाज़ तिलावत-ए- कलाम-ए-पाक से होगा, जिसे कारी मुबारक हुसैन ज़ैदी साहब अंजाम देंगे। इसके उपरांत मौलाना मीसम जैदी साहब महफिल-ए- मकासिदे को खिताब करेंगे। महफिल के समापन पर बज़रिए कुरआन दाज़ी मौजूद सामईन के दरमियान इनआमात तक़्सीम किए जाएंगे।
इस अवसर पर मशहूर शायर नज़रानाए अक़ीदत पेश करेंगे।

पोस्टर में त्रुटि के कारण कुछ शायरों के नाम छूट गए थे, जिनमें बनारस के मशहूर शायर रौशन बनारसी, आरिफ अकबराबादी, और मौलाना हुसैनी के नाम शामिल हैं।
ईद-ए-ग़दीर और इसका ऐतिहासिक महत्व
ईद-ए-ग़दीर का यह पावन अवसर ग़दीर-ए-खुम की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जहां रसूल-ए-खुदा (स.अ.व.) ने हज़रत अली (अ.स.) को अपना उत्तराधिकारी और मोमिनीन का वली घोषित किया था। यह ऐलान ग़दीर-ए-खुम के मैदान में हुआ, जब रसूल-ए-खुदा ने फरमाया, “मन कुन्तु मौलाहु फ हाज़ा अलीयुन मौलाहु” (जिसका मैं मौला हूँ, उसका यह अली मौला है)। इस ऐलान ने विलायत-ए-अली के उसूल को स्थापित किया, जो शिया समुदाय के लिए अक़ीदा-ए-ईमान का हिस्सा है।
पंजतन-ए-पाक और उनकी फज़ीलत
महफिल में मौलाना मीसम जैदी साहब ने पंजतन-ए-पाक की फज़ीलत और उनके मौजिजात पर रौशनी डालेंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण घटना, जिसका ज़िक्र इस महफिल में होगा, वह है “मोबाहिला”। यह वह मौका था जब रसूल-ए-खुदा (स.अ.व.व) ने नजरान के ईसाइयों के साथ मोबाहिला के लिए पंजतन-ए-पाक को अपने साथ लिया। जब नजरान के प्रतिनिधियों ने पंजतन-ए-पाक को देखा, तो उन्होंने मोबाहिला से पीछे हटना बेहतर समझा, जिसे इस्लामी इतिहास में पंजतन-ए-पाक की फज़ीलत और उनके आध्यात्मिक मकाम की एक बड़ी मिसाल माना जाता है।
विलायत का मफहूम
विलायत, इस्लामी तालीमात में एक अहम उसूल है, जो हज़रत अली (अ.स.) की इमामत और रसूल-ए-खुदा (स.अ.व.) के बाद उनकी रहनुमाई को क़ुबूल करने का नाम है। ग़दीर-ए-खुम की घटना ने विलायत के इस मफहूम को दुनिया के सामने स्पष्ट किया। यह महफिल उन लोगों के लिए है, जो विलायत-ए-अली को क़ुबूल करते हैं, पंजतन-ए-पाक की फज़ीलत को समझते हैं, और इस अक़ीदे की हक़ीक़त को और गहराई से जानना चाहते हैं।
आयोजन की तैयारियां और कमेटी की अपील
महफिल की तैयारियों को लेकर तंजीम-ए-पैग़ाम-ए-ग़दीर की कमेटी ने तमाम इंतिज़ामात पूरे कर लिए हैं। कमेटी ने मोमिनीन से अपील की है कि वह इस महफिल में कसीर तादाद में शिरकत करें और इस पावन अवसर का आध्यात्मिक फायदा उठाएं। यह महफिल न केवल ग़दीर-ए-खुम की याद को ताज़ा करती है, बल्कि पंजतन-ए-पाक के पैग़ाम-ए-मोहब्बत, इंसाफ, और इंसानियत को भी फैलाने का एक ज़रिया है।
यह आयोजन उन लोगों के लिए एक अनमोल मौका है, जो ग़दीर के पैग़ाम और विलायत-ए-अली के मफहूम को समझना चाहते हैं।महफिल का संचालन शायर नय्यर मजीदी साहब करेंगे और महफिल के संयोजक ज़की भारती हैं।



